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Tuesday, October 19, 2010


मौसम

बारिश का ये मौसम,
कुछ याद दिलाता है !
किसीके साथ होने का,
एहसास दिलाता है !

फिज़ा भी सर्द है,
यादें भी ताज़ा है !
ये मौसम किसीका प्यार,
दिल में जगाता है !

भीगी हुई रातें,
ख़ामोश सी बातें,
ऐसे में कुछ कहूँ तो,
हर लफ्ज़ मरहम हो जाता है !

बरसात की है बूँदें,
बूँदों में है ख़ुशबू,
ये लम्हा दिल का एहसास छू जाता है !

अब कह दो तुम अपने दिल की बात,
ये मौसम पल भर में बीत जाता है !

Monday, October 11, 2010



तलाश

निकले थे कुछ दूर हम,
आज़ाद पंछी की तरह,
मिल जाए कहीं हमें वो जगह,
खुला आकाश, अपनी ज़मीन,
पंख फैलाये, हम थे लीन !
जग अपना, खुशियाँ अपनी,
लगा जैसे, कहीं वो तो नहीं,
आज उड़ने का मन था,
कहना कुछ भी कम था,
पर पल हर पल एक आस है,
आज भी हमें तलाश है !

Tuesday, October 5, 2010


दर्द-ए-दिल

शाम होते ही चिरागों को बुझा दिया,
तेरी याद में अपने दिल को जला दिया !

क्या करें शायद अपनी राहें जुदा हैं,
वफ़ा बस नाम की है, बेवफ़ाई का फ़साना है !

मोहब्बत किया और उसे पहचाना हमने,
दिल की बेचैन उमंगों को मिटा दिया तुमने !

रात के जलते दिये दिन में बुझ गए,
तेरे प्यार की हर वो यादें मिट गए !

जाने क्या क्या वादा किया था तुमने,
पलभर का तेरा साथ भी न पाया हमने !

आसमां पर लिखकर जाऊँ है प्यार तुझसे,
इस दिल में तेरे प्यार का चिराग जलता रहे !

Monday, September 27, 2010


एहसास

मेरा जीवन था बिखरा बिखरा,
बह निकला एक दरिया सा,
दिल में तुमने मुझे बसाया,
साथ हर मुश्किल में मेरा दिया !

एहसास हो तुम मेरे मन का,
धड़कन हो मेरी ज़िन्दगी का,
तुम सागर हो तुम साहिल भी,
तुम रास्ता भी और मंज़िल भी !

किस्मत से हम एक दूजे से मिले,
चलता रहे यूँ प्यार के सिलसिले,
जो दिल कहता वो तुम सुन लो,
तुम मेरे हो तुम मेरे हो !

ये जनम जनम के रिश्ते हैं,
सम्बन्ध प्यार से बनते हैं,
तुम्हारे बाहों में हमेशा रहूँ,
इस एहसास को जीवन भर पा सकूँ !

Thursday, September 23, 2010


सदा की साथी

माँ पिताजी की आँखों में आँसू न आए,
हर कदम पर हम उनका साथ निभाए,
बाधा-विपत्ति मुश्क़िलों में न मुँह मोड़े,
छोटी सी हर ख़ुशी उनके साथ बांटे !

ज़रूरी नहीं माँ पिताजी को सोना चांदी दे,
पर उनका जिगर जले ये कतई होने न दे,
उनके प्यार और ममता को पूजे सदा,
माँ पिताजी से बढ़कर न है कोई दूजा !

घर का नाम रखे मातृछाया या पितृछाया,
पर अपने माँ पिताजी का पड़ने न दे परछाईयाँ,
क्यूँ रखें हम दिखाने के लिए ऐसा नाम,
सुख शान्ति न रहे ऐसे घर का क्या काम !

माँ पिताजी की आँखें न होने देंगे नम,
चाहे उनसे दूर जाएँ पर मुस्कुरायेंगे हम,
माँ पिताजी चाहे हमें कितना ही डांटे,
पर उनकी इज्ज़त करना कभी न भूलें !

माँ पिताजी ने हमें बोलना सिखाया,
उँगलियाँ पकड़कर हमें चलना सिखाया,
जीवन के अँधेरे पथ पर रौशनी बनकर रहे,
आज उन्हीं की बदौलत इस मुकाम पर पहुँचे !

चाहे हम कितना ही धन दौलत कमाए,
पर माँ पिताजी के आशीर्वाद बिना अधूरा रह जाए,
उनके वजह से हमें अच्छी ज़िन्दगी मिली,
याद रखें सदा माँ पिताजी के विकल्प कोई नहीं !

Saturday, September 18, 2010


वादियाँ

ऊँचे ऊँचे पहाड़ों से बहता पानी राग अलापता है,
सावन का सरगम मन को उत्साह से भरता है,
कभी मन करता है रुक जाऊँ और इनमें खो जाऊँ,
कभी दिल करता है दौड़ पडूँ पहाड़ की उंचाई पर !

दिल करता है बड़े छोटे पेड़ों से बात करती ही रहूँ,
इन ख़ूबसूरत वादियों का भरपूर आनंद लेती रहूँ,
घने काले बादल फैले हुए हैं मानो चादर की तरह,
जी करे बादलों को पकड़कर दूर कहीं उड़ जाऊँ !

कभी मन चाहे भीग जाऊँ पूरी तरह बारिश में,
कभी लगे इन खुली वादियों में झूमती रहूँ,
सच में ये सावन
आह्लादित करता है,
गाँव की खुशबू एक अजीब सुकून देती है !

गोबर की भीनी सी महक हवा में जादू घोलती है,
मानो किसी मेहबूब की यादें लेकर चली आ रही है,
यूँ तो कभी मिलता नहीं आसमाँ अपनी ज़मीं से,
क्यूँकि जीवन खिलता है इस कमी से !

Tuesday, September 14, 2010


हिन्दी दिवस

हम हिन्दी दिवस गर्व और उलास के साथ मनाते हैं,
हिन्दी में कार्य करने का संकल्प दोहराते हैं !

शान से हम सब हिन्दी प्रेमी कहलाते हैं,
सच्चे मन से हर देशवासी हिन्दी भाषा को पूजते हैं !

हिन्दी में हर काम करने में गर्व महसूस करते हैं,
हिन्दी में निरंतर अभ्यास जारी रखते हैं !

हर कठिनाइयों को दूर करने की ठान लेते हैं,
हिन्दी भाषा में ज्ञान प्राप्त करने की सोचते हैं !

विदेशी हमारी हिन्दी भाषा सिखने में उत्सुक रखते हैं,
हम अपनी हिन्दी भाषा पर फक्र महसूस करते हैं !

आओ हम सब मिलकर हिन्दी दिवस की सम्मान करें,
हिन्दी भाषा के प्रति प्यार हर देशवासी के दिल में रहे !

लाखों लोग हुए हमारे देश के लिए कुर्बान,
अपने देश और भाषा को न होने देंगे बदनाम !

अपने देश के प्रति प्यार और भावना सदा बढ़ाएं,
सब मिलकर हिन्दी दिवस का सम्मानित करें !