
प्रिय मित्रों
मैं एक महीने के लिए छुट्टी पर जा रही हूँ ! आप सभी को बहुत याद करुँगी! क्रिसमस और नए साल की हार्दिक शुभकामनायें आप सब को और आपके परिवार को!
बबली (उर्मी)
Wednesday, December 9, 2009
Posted by Babli at 9:10 PM 10 comments
Sunday, December 6, 2009
| नवनिर्माण जहाँ नैतिकता का पतन हो, मानवता का दफ़न हो, जहाँ नवयुवकों के सर पे कफ़न हो, फिर भी करेंगे अपने वतन को सलाम हम ! जिसके बच्चे के सीने में जलन हो, मानव-मानव से त्रस्त हो, क़दम-क़दम पर धोखा, भ्रष्टाचार और रिशवत हो, फिर भी करेंगे अपने वतन को सलाम हम ! नैतिकता का अब बोलबाला कहाँ, आदम-आदमखोर बनकर रहता है जहाँ, छातियाँ भी डरती है संगीनों से, फिर भी करेंगे अपने वतन को सलाम हम ! जनता भी कम नहीं कमीनों से, होती है बलात्कार सामने, पूछते फिरते हैं, कल की घटना सुना है आपने, फिर भी करेंगे अपने वतन को सलाम हम ! |
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Posted by Babli at 3:47 PM 14 comments
Tuesday, December 1, 2009
रसगुल्ला गोल गोल रसीले, अरे ये तो हैं रसगुल्ले, जो भाये मन सबका, ये मिठाई है गज़ब का ! मम्मी ने आज दोस्तों को बुलाया, अपने हाथों से बनाया रसगुल्ला खिलाया, गरमागरम रसगुल्ले खाकर सबको आनंद आया, प्यार से भरा मिठाई सबके मन को भाया ! गुजराती हो या पंजाबी, बिहारी हो या बंगाली, सबको लगे ये रसगुल्ले निराली, पूजा हो या फिर जन्मदिन, खाते रहो रसगुल्ले प्रतिदिन ! |
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Posted by Babli at 3:46 PM 19 comments
Tuesday, November 24, 2009
अरमान नीले नीले आसमान तले, बैठी थी मैं अरमान लिए, दूर कहीं जाना था मुझे, पर बैठ गई मैं हाथ मले ! बदल गया मौसम का रंग, रह गई रूप मैं देख दंग, मेरा मन पागल सा झूमा, भँवरे ने कलियों को चूंमा ! अरमानों ने ली अंगड़ाई, मुखड़े पर खुशियाँ है छाई, चलते चलते रुक गए कदम, बेदम दिल ने पाया है दम ! बह गई उसी पल एक हवा, बन गया शीत सा गरम तवा, क्या सोचा था और क्या पाया, चलकर बसंत द्वारे आया ! |
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Posted by Babli at 3:36 AM 17 comments
Thursday, November 19, 2009
| रिश्ता तुम्हारी खुशी से ही नहीं, गम से भी रिश्ता है हमारा, ये जो तुम्हारी ज़िन्दगी है, वो एक हिस्सा है हमारा ! प्यार का रिश्ता बहुत गहरा है हमारा, सिर्फ़ लफ़्ज़ों का ही नहीं, रूह का भी रिश्ता है हमारा, तुम बिन अब जीना नहीं है गवारा ! बस एक गुज़ारिश है तुमसे मेरी, एक शाम चुरा लूँ मैं तुम्हारी, तुम चाहो तो भुला देना मुझे, पर मैं न भुला पाऊँगी तुझे ! मेरे हाथों से गिर गई लकीरें कहीं, भूल आई हूँ अपनी तकदीर कहीं, अगर तुम्हें मिले तो उठा लेना, मेरे हिस्से की हर खुशी हाथों में सजा लेना ! |
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Posted by Babli at 4:09 PM 26 comments
Wednesday, November 11, 2009
माँ माँ तुम अत्यन्त ममतामयी हो, तुम्हीं कमला तुम्हीं वांग्मयी हो, उर्जा से भरपूर संदील धूप हो, तुम देवी की मूरत हो! माँ पहले खाना मुझे खिलाती, बाद में तुम ख़ुद खाना खाती, मेरी खुशियों में खुश होती, मेरे दुखों में आँसूं बहाती! तुमने मुझे संस्कार सिखलाया , अच्छा बुरा मुझे बतलाया , मेरी गलतियों को सुधारा , हमेशा मुझपर प्यार बरसाया । तुम अमृत की गागर हो, फूलों जैसी कोमल और नाज़ुक हो, तुम बिन मेरा जीवन है अधूरा, हाँ माँ तुम ही मेरे जीने की वजह हो ! |
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Posted by Babli at 10:33 PM 20 comments
Sunday, November 8, 2009
| अकेलापन वीरान है ये आंखें मेरी, राह देख रही हूँ बस तेरी, छाई है यहाँ सुनी रातें, याद दिलाये तुम्हारी बातें ! बादलों ने ऐसे घेर लिया, उसे लिपटकर आँखों को बंद किया, आया कैसा ये सुहाना मौसम, बहने लगा जैसे प्यार में आलम ! रिमझिम रिमझिम बरसे सावन, भीगा तनमन मांगे साजन, इन वादियों ने मेरा मन मोह लिया, आ भी जा, अब आ भी जा मेरे पिया ! |
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Posted by Babli at 8:10 PM 15 comments
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