| ग़ज़ल सम्राट पृथ्वी है लाखों वर्ष पुरानी, जीवन है एक अनंत कहानी, जन्म-मरण का ये अविरल फेरा, जीवन बंजारों का है डेरा ! जीवन का ये दस्तूर, आज यहाँ कल कहाँ, प्रतिदिन जीवन में आता है परिवर्तन, जीवन की ढलने जाती है सांझ, तब उमर भी नहीं देती है साथ ! जगजीत सिंह जी को कोई भूल न पायेगा, उनके जैसा सुर-साधक कोई दूजा न आयेगा, विश्वभर में विख्यात था जिनका अंदाज़, गूँज रही है अब भी उनकी मधुर आवाज़ ! दुनिया को छोड़ गए करके शुन्यता, हर चेहरे पे छा गई है उदासीनता, ग़ज़ल सम्राट के नाम से थे मशहूर, उनको मेरा श्रद्धा-नमन है भरपूर ! |
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Thursday, October 13, 2011
Posted by Urmi at 8:23 PM 35 comments
Sunday, October 9, 2011
| दर्द रूठी तन्हाई, दर्द की बाहें घिरी, ढूँढें मंज़िल ! मूक ज़िन्दगी, सब सहे ज़िन्दगी, फिर भी चले ! अचंभित हूँ, धडकनें जो मिली, रूकती नहीं ! आँखें छलके, बहे तपते आँसू, फिर भी जागे ? बिना सहारे, तेरी आस में जिए, यही है जीना ? सहन नहीं, यूँ घुटकर जीना, ज़हर पीना ? |
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Posted by Urmi at 6:26 PM 25 comments
Sunday, October 2, 2011
| गाँधी जयंती राष्ट्रपिता तुम कहलाते हो, सभी प्यार से कहते बापू ! तुमने हम सबको मार्ग दिखाया, सत्य अहिंसा का पाठ पढ़ाया ! हम सब तेरी संतानें हैं, तुम हो हमारे प्यारे बापू ! सीधा-सादा वेश तुम्हारा, नहीं कोई अभिमान ! खादी की एक धोती पहने, वाह रे बापू तेरी शान ! एक लाठी के दम पर तुमने, अंग्रेजों की जड़ें हिलाई ! भारत माँ को आज़ाद कराया, रखी देश की शान ! आज तुम्हारे जन्मदिवस पर, हम करते हैं शत शत नमन ! |
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Posted by Urmi at 8:17 PM 26 comments
Friday, September 23, 2011
| ख़ाक होने से पहले रूठे हो मुझसे, बात भले न करना तुम, सिर्फ़ एक बार सीने से लगालो तुम ! ख़ाक होने से पहले जो पुकारूँ नाम, सुनके मुझे पास में बुलालो तुम ! वक्त की धारा में बिछड़े हैं हम दोनों, बनके कश्ती किनारे पे लगालो तुम ! तन्हाई का शिकार हूँ मैं, जानते हो तुम, तन्हा न करो और मुझे संभालो तुम ! दूर रहकर भी तुम अपने-से लगते हो, पास आकर अजनबी न बनालो तुम ! सहारा नहीं माँगा है तुमसे मगर, मझधार से अब तो निकालो तुम ! |
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Posted by Urmi at 9:49 AM 28 comments
Friday, September 2, 2011
| ख़्वाबों में मत तराश
उदास रात की कोई सुबह हसीन नहीं होती, ख़ुशी के एक लम्हें के लिए तरस जाती ! न आसमाँ है मेरा, न ज़मीन ही है मेरी, जिसे माना अपना, बेगाना-सा लगे वहीँ ! मैं ख़ुशबू बनकर हवा में नहीं बसती, मैं किरणों की तरह महीन भी नहीं ! मुझे तू ख़्वाबों में मत तराश अभी, उड़ती तितली की तरह मैं रंगीन नहीं ! छुप जाते हैं बादल में कभी चाँद व तारे, गुमसुम रहकर देखती हूँ वो सब नज़ारे ! भुला दिया उसने प्यार करके मुझे, मिलने पर वो पहचाने, मुझे ये यकीन नहीं ! टूटे हुए कांच की तरह बिखर गई मैं तो, मिले न अब पनाह तक, ये सोचकर रोयी ! बुझ गया ये "दीप", सुबह के सितारे के लिए, खुश हूँ मिटकर भी, मैं ज़रा गमगीन नहीं ! |
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Posted by Urmi at 7:32 PM 44 comments
Sunday, August 28, 2011
| दरिया
सागर से बिछड़ा दरिया हूँ मैं, क़ाश कहीं पर फिर मिल जाऊँ, बादल ने चुराया जिसका पानी, उस धरा को आज भिगो जाऊँ ! कैसे रहूँ बिन सागर के मैं, अधूरा सा रहने लगा हूँ उसके बिन, सागर से संगम कब होगा? ये आस लिए मैं बिखरी धरा पर ! न लाया था कुछ, न ले जाऊँ, समंदर में फिर समा जाऊँ, इस मोह से बंधन टूटा पर, इस माया से कैसे मुक्ति पाऊँ? कुछ क़र्ज़ लिए थे दे जाऊँ, कुछ अश्क मिले थे पी जाऊँ, मैंने भी पाया ज़ख्म यहाँ पर, मगर औरों को खुशियाँ दे जाऊँ ! |
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Posted by Urmi at 7:02 PM 35 comments
Monday, August 22, 2011
| कान्हा का जन्मदिवस
माखन खाए, शोर मचाये, गोपियों के संग रास रचाए, मुरली बजाके मन बहलाए, है वो नटखट नंदगोपाल ! गोकुल में करे जो निवास, सबके मन में है कान्हा का वास, बारिश में झूमे सारी गोपियाँ, कान्हा देखे गोपियों की मस्तियाँ ! माखन चुराकर जिसने खाया, बंसी बजाकर जिसने नचाया, ख़ुशी मनाओ उनके जन्म की, जिसने दुनिया को प्रेम करना सिखाया ! बच्चे बूढ़े सभी झूमे मस्ती में, सबके दिल में है ज़ोश उत्साह, उमंग से भरा ये पल रहे हमेशा, कान्हा का आशीर्वाद रहे सर्वदा ! |
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Posted by Urmi at 2:24 AM 25 comments
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