BLOGGER TEMPLATES AND TWITTER BACKGROUNDS �

Sunday, November 27, 2011

उन शहीदों को नमन

आज फिर बाँका सिपाही, जंग में इक मर गया,
जाते-जाते साँस अपनी, नाम माँ के कर गया !

झेल कर सीने पे अपने, दुश्मनों के वार को,
फूल बूढ़ी माँ की बगिया का यकायक झर गया !

जिंदगी कैसे कटेगी, माँ की बिन बेटे के अब,
प्रश्न आँखों की नमी का, मौन हर उत्तर गया !

उस सिपाही ने भी चाहा था कि घर आबाद हो,

अब तो उसकी माँ का जीना, हो बहुत दूभर गया !

फक्र करती माँ शहादत पर, तुम्हारी रात दिन,

कहते फिरती बेटा मेरा, करके ऊँचा सर गया
!

उन शहीदों को नमन जो घर की सीमा लाँघ कर,

हँसते-हँसते देश पर, कर जान न्यौछावर गया !


Sunday, November 20, 2011

ख्वाइश

कैसे
कहूँ की अपना बना लो मुझे,
बाहों में अपनी समा लो मुझे !

बिन तुम्हारे एक पल भी कटता नहीं,
तुम आकर मुझी से चुरा लो मुझे !

ज़िन्दगी वो है जो संग तुम्हारे गुज़रे,
दुनिया के ग़मों से अब चुरा लो मुझे !

मेरी सबसे गहरी ख्वाइश हो पूरी,
तुम अगर पास अपने बुलालो मुझे !

ये कैसा नशा है जो बहका रहा है,
तुम्हारा हूँ मैं संभालो मुझे !

नजाने फिर कैसे गुज़रेगी जिंदगानी,
अगर अपने दिल से कभी निकालो मुझे !

Sunday, November 13, 2011

मासूम चिड़िया

एक चिड़िया,
उड़ती हुई आयी,
आँगन में !

देखा उसको,
चारों ओर देखते,
आँखें प्यारी-सी !

दाना खिलाया,
मुझे देखती रही,
बड़े प्यार से !

कुछ देर में,
पंख फैलाये उड़ी,
हुई उदासी !

अगले दिन,
सुबह वहीँ बैठे,
उसको पाया !

पल में उड़ी,
साथी संग वो आयी,
साथ में बैठी !

घोंसला बना,
अंडा देने वाली थी,
अन्दर घुसी !

कुछ देर में,
फिर से उड़ गई,
राह तकूँ मैं !

आयी वापस,
साथी को संग लिए,
चुपके से वो !

हफ्ते भर में,
दिए अंडे उसने,
नन्ही-सी जान !

छोटे-से बच्चे,
चूँचूँ-चूँचूँ करती,
मन को भाती !


Monday, November 7, 2011

एक नयी कहानी

ये कहानी, ये किस्से,
है ज़िन्दगी के ही हिस्से,

फिर भी हम इन्हें,
क्यूँ अपना नहीं पाते?


जितने ये पास आते,
उतने ही हम दूर जाते,
इन किस्सों से सपनों को सजाकर,
जीवन को क्यूँ नहीं सँवारते?


फिर आहट ह्रदय लेकर,
फिरते हैं इधर उधर,
किस्से बन जाते हैं नये,
वैसे ही जैसे कुछ पुराने !

फिर भी सदियों से,
लोग किस्से बनाते रहे,
और कहानी उनकी हर युग में,
सबको सुनाते ही रहे !

मैं भी एक किस्सा हूँ,
क्यूँकि समय का हिस्सा हूँ,
होगी मेरी भी एक कहानी,
जो बनेगी अस्तित्व की निशानी !

फिर कैसे मैं सोचूँ,
एक दिन अचानक मिट जाऊँगी,
मैं इतिहास के पन्नों पर,
अंकित हो जाऊँगी !


Monday, October 31, 2011

बेसहारा औरत

एक औरत,
मासूमियत भरी,
देखती रही !

आँखें नम-सी,
भूख से तड़पती,
पैसे माँगती !

दिल ने कहा,
बेबसी देखकर,
करूँ मदद !

पूछा उससे,
क्यूँ माँग रही भीख,
कुछ न बोली !

सिर हिलाए,
समझाना चाहती,
वो तो गूँगी थी !

तरस आया,
बेचारी असहाय,
वो थी अकेली !

उसे बुलाया,
संग घर ले आयी,
पनाह दे दी !

खुश हो गई,
काम करना सीखा,
मिली ज़िन्दगी !

Sunday, October 23, 2011

दिवाली आयी

दीपों की पंक्ति में हँसती,
दिवाली की रात है आयी !

सब लोगों ने मिल-जुल कर,
घर-आँगन की करी सफाई !


रंग बिखेर रही फुलझड़ियाँ,
राकेट और पटाखे लड़ियाँ !

खिलखिलाते हुए अनार,
इन्द्रधनुष सा छाया है बहार !


घर आँगन दीपों की माला,
फैला चारों ओर उजाला !


बम फटे और चले पटाखे,
रोशनी से मूंद-मूंद गयी आँखें !

खुशियाँ बाँटो बारम्बार,
ये संदेश देती है त्यौहार !


सबको मिले प्रभु का प्यार,
जीवन में सुख अपरम्पार !


दीप जले हैं देखो झिलमिल,
सबने ख़ुशी मनाई हिलमिल !


घर-घर में छायी खुशहाली,
मुस्काती आयी दिवाली !


Wednesday, October 19, 2011

बारिश की फुहार

रोए पर्वत,
चूम कर मनाने,
झुके बादल !

कुछ जज़्बात,
काले बादलों जैसे,
छाए मन में !

हल्की फुहार,
रिमझिम के गीत,
रुके न झड़ी !

एक भावना,
उभर कर आई,
बरस गई !

बादल संग,
आँख मिचौली खेले,
पागल धूप !

करे बेताब,
ये भयंकर गर्मी,
होगी बारिश !

झुका के सर,
चुपचाप नहाए,
शर्मीले पेड़ !

गीली आँखें,
कर गई मन को,
हल्का हवा-सा !

ओढ़ चादर,
धरती आसमान,
फुट के रोए !

मन मचला,
हुआ है प्रफुल्लित,
नया आभास !