| वर्षा ऋतु भीषण गर्मी, तपती है धरती, है परेशान ! नभ की ओर, आँखें लगाए सभी, करते दुआ ! वर्षा की रुत, सूखा पड़ा है खेत, किसान दुखी ! मेघ गरजा, मुसलाधार वर्षा, धरा मुस्काई ! झूमता मन, रिमझिम के गीत, गुनगुनाए ! शीश झुकाए, वर्षा ऋतू में तरु, हरे-भरे से ! चमक उठे, चेहरे हैं सबके, बौछार पड़ी ! |
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Sunday, December 18, 2011
Posted by Urmi at 1:53 AM 23 comments
Monday, December 12, 2011
| तूफ़ान हर ख्वाइश पूरी हो जिसकी ऐसा कोई इंसान नहीं, हर कदम पे हार जाये कुछ भी हो वह तूफ़ान नहीं ! जीतना है अगर तो हारने पर हिम्मत न टूटे, जीवन में किसी मुकाम पर हौसला न छूटे ! वक़्त भले ही कम हो पर जाना है हमको दूर, मुश्क़िलों का कर सामना मंज़िल पाना मंज़ूर ! कितना भी तूफ़ान आ जाये पर हौसला कम न हो, कदम लड़खड़ाये भले पर गिरने का गम न हो ! |
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Posted by Urmi at 9:52 PM 34 comments
Sunday, December 4, 2011
| प्रकृति का दृश्य नीले नभ में, उड़े पंख फैलाये पंछी, मन को भाये ! सिसकी हवा, उड़ चल रे पंछी, नीड़ पराया ! आस है मुझे, पंछी जैसे मैं उडूं, विश्व में घूमूँ ! धरा की धूल, छूने लगी आकाश, हवा के साथ ! उड़ती फिरूँ, सारी दुनिया देखूँ, मैं गीत गाऊँ ! कभी मैं बैठूँ, प्रकृति को निहारूँ, ख़ुशी से झूमूँ ! ऊषा ने बाँधी, क्षितिज के हाथों में, सूर्य की राखी ! अपूर्व दृश्य, तस्वीर बना डालूँ, क्या करिश्मा ! रश्मि की लाली, सूरज को प्रणाम, धरा के नाम ! धूप सुबह, ओस-सा झिलमिल, इक सपना ! |
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Posted by Urmi at 10:17 PM 34 comments
Sunday, November 27, 2011
| उन शहीदों को नमन आज फिर बाँका सिपाही, जंग में इक मर गया, जाते-जाते साँस अपनी, नाम माँ के कर गया ! झेल कर सीने पे अपने, दुश्मनों के वार को, फूल बूढ़ी माँ की बगिया का यकायक झर गया ! जिंदगी कैसे कटेगी, माँ की बिन बेटे के अब, प्रश्न आँखों की नमी का, मौन हर उत्तर गया ! उस सिपाही ने भी चाहा था कि घर आबाद हो, अब तो उसकी माँ का जीना, हो बहुत दूभर गया ! फक्र करती माँ शहादत पर, तुम्हारी रात दिन, कहते फिरती बेटा मेरा, करके ऊँचा सर गया ! उन शहीदों को नमन जो घर की सीमा लाँघ कर, हँसते-हँसते देश पर, कर जान न्यौछावर गया ! |
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Posted by Urmi at 8:09 PM 33 comments
Sunday, November 20, 2011
| ख्वाइश कैसे कहूँ की अपना बना लो मुझे, बाहों में अपनी समा लो मुझे ! बिन तुम्हारे एक पल भी कटता नहीं, तुम आकर मुझी से चुरा लो मुझे ! ज़िन्दगी वो है जो संग तुम्हारे गुज़रे, दुनिया के ग़मों से अब चुरा लो मुझे ! मेरी सबसे गहरी ख्वाइश हो पूरी, तुम अगर पास अपने बुलालो मुझे ! ये कैसा नशा है जो बहका रहा है, तुम्हारा हूँ मैं संभालो मुझे ! नजाने फिर कैसे गुज़रेगी जिंदगानी, अगर अपने दिल से कभी निकालो मुझे ! |
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Posted by Urmi at 7:55 PM 34 comments
Sunday, November 13, 2011
| मासूम चिड़िया एक चिड़िया, उड़ती हुई आयी, आँगन में ! देखा उसको, चारों ओर देखते, आँखें प्यारी-सी ! दाना खिलाया, मुझे देखती रही, बड़े प्यार से ! कुछ देर में, पंख फैलाये उड़ी, हुई उदासी ! अगले दिन, सुबह वहीँ बैठे, उसको पाया ! पल में उड़ी, साथी संग वो आयी, साथ में बैठी ! घोंसला बना, अंडा देने वाली थी, अन्दर घुसी ! कुछ देर में, फिर से उड़ गई, राह तकूँ मैं ! आयी वापस, साथी को संग लिए, चुपके से वो ! हफ्ते भर में, दिए अंडे उसने, नन्ही-सी जान ! छोटे-से बच्चे, चूँचूँ-चूँचूँ करती, मन को भाती ! |
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Posted by Urmi at 7:44 PM 30 comments
Monday, November 7, 2011
| एक नयी कहानी ये कहानी, ये किस्से, है ज़िन्दगी के ही हिस्से, फिर भी हम इन्हें, क्यूँ अपना नहीं पाते? जितने ये पास आते, उतने ही हम दूर जाते, इन किस्सों से सपनों को सजाकर, जीवन को क्यूँ नहीं सँवारते? फिर आहट ह्रदय लेकर, फिरते हैं इधर उधर, किस्से बन जाते हैं नये, वैसे ही जैसे कुछ पुराने ! फिर भी सदियों से, लोग किस्से बनाते रहे, और कहानी उनकी हर युग में, सबको सुनाते ही रहे ! मैं भी एक किस्सा हूँ, क्यूँकि समय का हिस्सा हूँ, होगी मेरी भी एक कहानी, जो बनेगी अस्तित्व की निशानी ! फिर कैसे मैं सोचूँ, एक दिन अचानक मिट जाऊँगी, मैं इतिहास के पन्नों पर, अंकित हो जाऊँगी ! |
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Posted by Urmi at 10:19 PM 31 comments
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