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Wednesday, November 11, 2009


माँ

माँ तुम अत्यन्त ममतामयी हो,
तुम्हीं कमला तुम्हीं वांग्मयी हो,

उर्जा से भरपूर संदील धूप हो,

तुम देवी की मूरत हो!
माँ पहले खाना मुझे खिलाती,
बाद में तुम ख़ुद खाना खाती,
मेरी खुशियों में खुश होती,
मेरे दुखों में आँसूं बहाती!
तुमने मुझे संस्कार सिखलाया ,
अच्छा बुरा मुझे बतलाया ,
मेरी गलतियों को सुधारा ,
हमेशा मुझपर प्यार बरसाया ।
तुम अमृत की गागर हो,
फूलों जैसी कोमल और नाज़ुक हो,
तुम बिन मेरा जीवन है अधूरा,
हाँ माँ तुम ही मेरे जीने की वजह हो !



20 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

माँ को सादर नमन!
वो बहुत खुशनसीब होते हैं,
जिनको माँ का सानिध्य मिलता है।
शायद मैं भी उनमें से एक हूँ!

Unseen Rajasthan said...

Jiska Pyar Simit Hai Use Aasma Kehte Hai Aur Jiska Pyra Asimit Hai Use "Maa" Kehte Hai.Dukh Jhel Kar Pyar Karne Wali Maa Ko Mera Sadar Namam.Bahut Hi Badhiya Rachna Hai.Yeh Apki Best Post Hai...Mera Sadar Naman.

ρяєєтι said...

Maa yahi hoti hai...

bahut sundar..!

संजय भास्कर said...

माँ तुम अत्यन्त ममतामयी हो,


तुम्हीं कमला तुम्हीं वांग्मयी हो,


उर्जा से भरपूर संदील धूप हो,


तुम देवी की मूरत हो!

संजय भास्कर said...

maa ko sadar parnam
bahut hi pyari kavita hai
maa bahut hi achhi hoti hai

SACCHAI said...

" baahut hi badhiya rachana "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

MANOJ KUMAR said...

सरस, रोचक और एक सांस में पठनीय रचना के लिए बधाई।

क्रिएटिव मंच said...

कुछ रचनाएं ऐसी होती हैं जिनकी तारीफ़ में हर शब्द बौने लगने लगते हैं ! मन को बांध लिया इस रचना ने !
'मां' तो एक शब्द में लिख गया महाग्रन्थ है !

स्नेह एवं शुभ कामनाएं

Dr.Aditya Kumar said...

आपका दूसरा ब्लॉग कवितायेँ देखा, सुन्दर भावाभिव्यक्ति मन को छू गयी .इसी प्रकार लिखते रहिये जिससे हम लोग आनंदित होते रहें.'

CSK said...

आपने जो ये मर्म-स्पर्शी पंक्तियाँ लिखीं हैं उन चरणों में अपने दिल के भावों को व्यक्त करने की आकांक्षा लिए मेरा ये कोमल-सा मन अधीर हो उठा है पर इतने शब्द ही नहीं इन जुबान पर की मैं और भी कुछ ज्यादा व्यक्त कर सकूँ सो आप मुझे क्षमा करना.

लोग कहते हैं कि
"ऊपर जिसका अंत नहीं उसे आसमां कहते हैं
और जिसके प्यार का अंत नहीं उसको ही माँ कहते हैं."

मगर मेरा दिल तो कुछ यूँ कहता है.......
"माँ तो ममता की मूर्ति है,बच्चों के दुःख भी सहती है
माँ की ममता से जी-जीकर ही दुनिया आगे बढती है. "

पंकज said...

मैम! खूबसूरत कविता. मां तो हमारे जीवन का आधार है. वो नहीं तो हम नहीं.

aleem azmi said...

maa ka rishta woh pak rishta hai jinke tareef karne ke liye bhi hum aur aapke alfaaz kam pad jayenge..maa to maa hai uska koi jawaab nahi ....

sandhyagupta said...

तुम बिन मेरा जीवन है अधूरा..

Hum sab ka jeevan maa ke bina adhura hai.Is sundar rachna ke liye badhai.

शरद कोकास said...

माँ के लिये तो दुनिया के सारे शब्द नाकाफी है । अच्छा लगा यह पढ कर

BAL SAJAG said...

ma to shabdo se pare hai.... Bhawanaon ke karib hai....
kabhi wkart mile to is bachchon ke blog par jarur aaiyega....

JHAROKHA said...

मां को लेकर लिखी गयी एक बेहतरीन रचना---बहुत सुकून मिला इसे पढ़कर्।
पूनम

ज्योति सिंह said...

माँ तुम अत्यन्त ममतामयी हो,


तुम्हीं कमला तुम्हीं वांग्मयी हो,


उर्जा से भरपूर संदील धूप हो,


तुम देवी की मूरत हो!
maa to maa hi hai aur maa ki khoobiyon ko bahut pyar se darshaya hai ,

सुलभ सतरंगी said...

माँ को समर्पित सुन्दर रचना !!

creativekona said...

सचमुच बब्ली जी,
मां---एक ऐसा शब्द है कि इस पर जितना भी लिखा जाय कम होगा ---और आपने तो इतनी खूबसूरत कविता लिखी है……॥बहुत बहुत बधाई।
हेमन्त कुमार

M VERMA said...

बहुत सुन्दर कविता
गजरौला टाईम्स में प्रकाशन के लिये बधाई