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Friday, August 21, 2009




बदलो

स्थान नहीं, शासन बदलो,
जात नहीं, जमान बदलो,
अगर कुछ बदलना चाहते हो
तो स्वयं बदलो !

गुल नहीं गुलज़ार बदलो,
रूप नहीं श्रृंगार बदलो,
परिवार नहीं संस्कार बदलो,
अस्पताल नहीं डॉक्टर बदलो !

आवाम नहीं आवाज़ बदलो,
धर्म नहीं अन्धविश्वास बदलो,
अगर कुछ बदलना चाहते हो
तो स्वयं बदलो !

कर्म नहीं तरीका बदलो,
कर्तव्य नहीं अधिकार बदलो,
राष्ट्र नहीं सरकार बदलो,
प्रेम नहीं नफ़रत को बदलो !

सृष्टि नहीं दृष्टि बदलो,
समाज नहीं जन बदलो,
अगर कुछ बदलना चाहते हो
तो स्वयं बदलो !!

21 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

स्थान नहीं, शासन बदलो,
मान नहीं, आसन बदलो,

बहुत बढ़िया बबली जी!
आप लिखती रहें,
लेखनी में निखार आता जायेगा।
बधाई।

M VERMA said...

सृष्टि नहीं दृष्टि बदलो,
समाज नहीं जन बदलो,
बहुत सुन्दर भाव व लेखन. बहुत अच्छा लगा.

Arvind Mishra said...

दार्शनिक भावों की सुन्दर कविता

vallabh said...

प्रेरक रचना...

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

wow...
another composition of yours...

हिमांशु । Himanshu said...

"सृष्टि नहीं दृष्टि बदलो" - इस एक वाक्य में छिपा है सब कुछ का हल । आभार ।

Dhiraj Shah said...

sundar badalav hai aap ke lekani me

शरद कोकास said...

कविता में कहीं कहीं विसंगतियाँ है लेकिन कविता का मूल भाव परिवर्तन की प्रासंगिकता है यह अच्छी बात है ।

क्रिएटिव मंच said...

आवाम नहीं आवाज़ बदलो,
धर्म नहीं अन्धविश्वास बदलो,
अगर कुछ बदलना चाहते हो तो स्वयं बदलो !
वाह वाह ...क्या बात है
बहुत खूब ... सच्ची पोस्ट

********************************
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क्रियेटिव मंच

काव्या शुक्ला said...

Sahi kaha, bahut si badli na jaane ke kaaran sad jati hain.
वैज्ञानिक दृ‍ष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को उन्नति पथ पर ले जाएं।

vikram7 said...

सृष्टि नहीं दृष्टि बदलो,
समाज नहीं जन बदलो,
अगर कुछ बदलना चाहते हो
तो स्वयं बदलो !!
आज के वर्तमान परिवेश मे इसी बात की आवश्कता हॆ, रचाना के माध्यम से व्यक्त विचार अच्छे लगे

amarjeet kaunke said...

very realistic.....sach hai khud ko badlo...

Sheena said...

bahut badiya Babli ji

-Sheena

SACCHAI said...

fantastic babli ,aapki kavita ki kuch kadiya dil ko chu gayi bahut hi accha nikhar is kavita me dikha hai ....

----- eksacchai {AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

मुकेश कुमार तिवारी said...

उर्मी जी,

कर्म नहीं तरीका बदलो,
कर्तव्य नहीं अधिकार बदलो,

बहुत सुन्दर बात कही है, पॉजिटिव्ह थिंकिंग के लिये किसी मैनेजमेंट गुरू के संदेश सा लगा, उदाहरण बतौर श्री शिव खेड़ा साहब का कथन है कि "विजेता उसी काम को दूसरे तरीके से करता है"

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

raj said...

अगर कुछ बदलना चाहते हो
तो स्वयं बदलो !!sahi baat hai duniya badlni hai to pahle khud ko badlo...

अमिताभ श्रीवास्तव said...

aadami yadi khud badal jaaye to is sansaar ke saare kasht khatm ho sakte he/
bahut achhi kavita he ji aapki/

mahesh sharma said...

बाबली आपकी कुछ कवितायें पढीं मुझे कविताओं के साथ प्रकाशित पेंटिंग्स अच्छी लगी। आपकी कलात्मक सृजनता अद्भुत है। मेरी रुचि कला में अधिक है,वैसे प्रोफेशन से मैं एक डॉक्टर हूँ

संजय भास्कर said...

बाबली आपकी कुछ कवितायें पढीं मुझे कविताओं के साथ प्रकाशित पेंटिंग्स अच्छी लगी।
SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्कर said...

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन


SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्कर said...

nice......