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Sunday, August 16, 2009




मेरा बचपन

याद आता है वो जमशेदपुर...
वो जुबली पार्क का समा,
वो बुलेट का सफर और गलियों की हवा,
वो बिष्टुपुर की रौनक और शाम का समा,
वो जमशेदपुर के मुहल्ले और मुहल्लों में भटकना,
याद आता है वो जमशेदपुर...

वो सुबह सुबह जल्दी उठना और स्कूल जाना,
स्कूल लेट पहुंचना, छुट्टी के समय गपशप करके आना,
वो जनवरी की सर्दी, वो बारिशों में साइकिल चलाना,
वो गर्मी के दिन, और छुट्टी का सारा महीना,
वो मम्मी का प्यार, वो पापा की डांट,
याद आता है वो जमशेदपुर...

दोस्तों का बतकही, वो दोस्तों की टशन,
याद आता है वही शाम को चार-पॉँच घंटे गप्पे करना,
घर में डांट पड़ना और दोस्तों के साथ वक़्त बिताना,
याद आता है वो जमशेदपुर...
याद आता है वो जमशेदपुर !!

36 comments:

सुलभ [Sulabh] said...

सचमुच बहुत याद आता है वो बचपन सुहाना वो शहर और घर अपना..

यादें बचपन की- अखबारों के पतंग बना..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ऊर्मी जी!
आपने बीती हुई यादों का सजीव चित्रण किया है।
बधाई!

गाँवों की गलियाँ, चौबारे,
याद बहुत आते हैं।
कच्चे-घर और ठाकुरद्वारे,
याद बहुत आते हैं।।

छोड़ा गाँव, शहर में आया,
आलीशान भवन बनवाया।
मिली नही शीतल सी छाया,
नाहक ही सुख-चैन गँवाया।
बूढ़ा बरगद, काका-अंगद,
याद बहुत आते हैं।।

yuva said...

bahut khoob hain yeh yaaden

M VERMA said...

बचपन के सुहाने दिन की याद ---
कचोटता है
सुन्दर चित्रण है आपकी कविता मे.
नए ब्लोग की बधाई

Pradip Biswas said...

Tatanagar or Tata I think that is more popular. Bistupur crossing and the markets on the Main Road, D. Menghani's shop, markets at the back road, Ghosal hotel and Nadia sweets, Dimna lake and Jubilee park( boating at the Jhil). This was the place where some poets used to meet stsrting from Nadia Sweet ending at Aambagannear Sakchi. A sweet kid often used tp hear our poetry staying behind the curtain. Mujhe ooaps dila do O din
O zindagi
O pagalpan
O sayari.

Sanjeet Tripathi said...

apni jameen aur apna samay yaad aata hi hai.

bahut badhiya.......ye na puchho kya bas bahut badhiya ;)

वाणी गीत said...

बहुत याद आता है बचपन ...!!

Suman said...

nice

रचना गौड़ ’भारती’ said...

सुन्दर कविता के लिये बधाई। यादें सच में प्यारी होती हैं।

योगेन्द्र मौदगिल said...

भई वाह... क्या कमाल का है जमशेदपुर.. अपन तो पानीपत से गये बहुत पर रहे कहीं नहीं.. आपकी अनुभूति अच्छी लगी..

AlbelaKhatri.com said...

waah urmiji,

bahut khoob !

phool k haath me phool dekh kar

anand a gaya............

aapke jamshedpur me aapke bachpan

se judi aapki yaadon ki mahak

humne bheetar tak mahsoos ki..........

badhaai !

ज्योति सिंह said...

nanha sa pyara sa bachapan ,adbhut hota ye aangan .meethi yaade sundar hai .

Udan Tashtari said...

बहुत खूब याद किया है..जमशेदपुर!!

अच्छा लगा नया ब्लॉग..शुभकामनाऐं.

Mithilesh dubey said...

bahut khoob , badi rochak yaden hai aapki.

नीरज गोस्वामी said...

बबली जी आप दो बधाईयों की हकदार हैं...सबसे पहली बधाई आपको इस नए ब्लॉग की, आपने इस ब्लॉग को इतना सुन्दर बनाया है की प्रशंशा के लिए शब्द नहीं मिल रहे...भीने रंग और नयनाभिराम चित्र मिल कर कमाल का समां बाँध रहे हैं...बहुत बहुत बहुत बहुत सुन्दर ब्लॉग...आपने कैसे और कहाँ से टेम्पलेट लिया हमें भी सिखाईये न...और दूसरी बधाई इस लाजवाब रचना के लिए जो हर उसको जो अपने शहर गाँव से दूर है , अपने घर बाहर की याद दिला जाती है...अपना शहर जहाँ बचपन बीता सबसे सुन्दर लगता है... वाह वा...
नीरज

Arvind Mishra said...

वाह आगाज ही जोरदार है !

hem pandey said...

एक उम्र के बाद सभी को अपने अपने जमशेदपुर शिद्दत से याद आते हैं. बचपन को याद दिलाती एक बढ़िया रचना

चंदन कुमार झा said...

बहुत सुन्दर...........शायरी के बाद अब कविताओ वाला ब्लाग.....बहुत उम्दा.
और अपने ब्लाग का आरम्भ भी आपने कितनी सुन्दर रचना से किया है......बस यूँ हीं अच्छी अच्छी रचनायें हमे पढने को मिलती रहे....आभार.

स्वागत है.

शरद कोकास said...

मै तो अपने बचपन की स्मृतियों और छोटे छोटे अनुभवों से उर्जा प्राप्त करता हूँ उन्हे कविता और गद्य मे ढालता हूँ ..यह कला सीख्नना ज़रूरी है // बहरहाल बहुत अच्छा लगा आपके इस ब्लॉग को देखकर -शरद कोकास ,

Dr. Mukul Srivastava said...

बहुत खूब
जब रात है ऐसी मतवाली फिर सुबह का आलम क्या होगा

SACCHAI said...

"yaad inhi yado ke sahare bhi kabhi jiya jata hai ....dil me dafan yaad kabhi marham banke aati hai to kabhi dard bankar .....supreb bahut hi accha likha hai ...aur haan...AAPKO AAPKE NAYE BLOG KE LIYE "eksacchai" KI AUR SE HARDIK SUBHECCHA."

----- eksacchai {AAWAZ}

http://eksacchai.blogspot.com

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

urmi ji,
aapka follower ban gaya hoon main...
achhi rachna likhi hai aapne...
aata rahunga...

Unseen Rajasthan said...

Old Memories So beautiful !! Great post..

शोभना चौरे said...

bacpan hi to hai jo sukhad anubhuti deta hai .

sandhyagupta said...

Likhte rahiye.Shubkamnayen.

अमिताभ श्रीवास्तव said...

jamshedpur yaani tatanagar..m i right...kher..bachpan ki yaade..aadmi ko hamesha pulkit rakhti he/ hnaa..aapne kavita ke liye blog open kiya..sukhad lagaa..,
shubhkamnaye

"MIRACLE" said...

बचपन तो राज सिंहहासन होता है .बचपन तो ना लौटने वाले सुख होते है जो जीवन भर याद आते है .....बबली जी मे आज मेरे ब्लॉग की वर्षगाँठ है इस अवसर पर आपका स्वागत है .....

Oc said...

Is this written by you ?? very sweet one

महफूज़ अली said...

waaqai mein bachpan bahut yaad aata hai........ aur khaaskar to wo jagah jahan humne bachpan bitaya hota hai.......... bachpan ka bahut hi sajeev chitran kiya hai aapne.........
----------------------------------
Aur haan! aapka yeh blog bahut hi khoobsoorat hai..........

naya blog create karne ke liye badhaai.......

विपिन बिहारी गोयल said...

बहुत सुंदर
तेज धूप का सफ़र

RAJESHWAR VASHISTHA said...

Amazing poetry...excellent presentation...

vikram7 said...

बीती हुई यादों का सुन्दर चित्रण

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

Very beautiful blog with very sentimental thoughts.
Yes ,it looks that our motherland always lives within.
I tell u that u have really written yr emotions in a unique way.
Dr.Bhoopendra

Satyamev Jayeta said...

Atyadhik Sunder aapne to hamari bachpan ke saari yaadein Taaza kar diye

संजय भास्कर said...

सुन्दर कविता के लिये बधाई। यादें सच में प्यारी होती हैं

संजय भास्कर said...

कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
बहुत सुन्दर रचना । आभार

ढेर सारी शुभकामनायें.