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Wednesday, January 27, 2010




जुदाई

तुम्हारी जुदाई ने हमें हर पल तड़पाया है,
दर्द छुपाकर मुस्कुराना तुम्हारी जुदाई ने सिखाया है !

लोगों के दर्द को अपना समझना और उसे सहना,
तुम्हारी जुदाई ने
हमें सिखाया है !

तन्हाई में घुटघुट कर रोता रहता ये दिल,
अफ़सोस है के तुमने हमें समझा अपने क़ाबिल !

मेरे गम मेरी ख़ुशी से ख़ुशनसीब है,
अब तो गमों ने आसुओं की कदर की है !

जाने क्यूँ रंगीन ख़्वाबों में परछाई सी दिखती है,
उस परछाई की आहट हमें बेचैन कर देती है !


अब तन्हाई साथ है और यही इत्तेफ़ाक है,
मेरे जीने का सहारा अब सिर्फ तेरी यादें है !















14 comments:

क्रिएटिव मंच-Creative Manch said...

तुम्हारी जुदाई ने हमें हर पल तरपाया है,
दर्द छुपाकर मुस्कुराना तुम्हारी जुदाई ने सिखाया है


bahut khoob
aisa hi hota hai
ek taraf hamdam ki judaayi ek taraf duniyadari.

sundar rachna
badhayi

SACCHAI said...

wah ! kya khub kaha hai aapne ...behatarin

तन्हाई में घुटघुट कर रोता रहता ये दिल,
अफ़सोस है के तुमने हमें न समझा अपने क़ाबिल !

मेरे गम मेरी ख़ुशी से ख़ुशनसीब है,
अब तो गमों ने आसुओं की कदर की है !

न जाने क्यूँ रंगीन ख़्वाबों में परछाई सी दिखती है,
उस परछाई की आहट हमें बेचैन कर देती है !

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

VICHARO KA DARPAN said...

bahut khoob .......tanhai mein yahi hall hota hai

मनोज कुमार said...

भावावेग की स्थिति में अभिव्यक्ति की स्वाभाविक परिणति दीखती है।

Apanatva said...

acchee rachana...

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

kya baat hai babli ji..

ek ek taar dil ki jhanjhanaa utthi...

bahut badhiyaa

संजय भास्कर said...

दर्द छुपाकर मुस्कुराना तुम्हारी जुदाई ने सिखाया है
kya baat hai babli ji..

LAJWAAB RACHNAA....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

रचना के भाव बहुत अच्छे हैं!
कविता में छन्द भी तो....!

Ravi Rajbhar said...

Apki hanshmukh tswir hi kafi hai ye batane ke liye ki aapkitani hansmukh hain..
Babli je bahut khusi hoti hai jab aap jaise hindi ke pujari hindi ki dharti se dur hote huye bhi iska hath nahi chhodate...thik iske viprit aaj apne hi ghar men hindi shangharshon se jujar rahi hai... dil se aapko bahut bahut badhai..

jamos jhalla said...

गम नहीं कर मुस्कुरा |जीने का लेले मज़ा बबली ये जिन्दगी है ख़ूबसूरत बला|

sada said...

सुन्‍दर शब्‍द रचना, बधाई ।

शरद कोकास said...

कविता अच्छी है लेकिन तस्वीर अजीब लग रही है

dipayan said...

जुदाई के दर्द को बहुत नायाब और भावनत्मक रूप से पेश किया । सुन्दर लेख ।

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।