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Tuesday, February 2, 2010



हमारा प्यारा देश

यह है हमारा प्यारा देश,
देश है खेत खलिहानों से,
मज़दूरों से किसानों से,
इनमें बसता है हमारा देश,
यह है हमारा प्यारा देश !


बच्चों की खिलखिलाहट से,
पंछियों की चहचहाहट से,
युवाओं की मुस्कुराहट से,

इनमें बसता है हमारा देश,
यह है हमारा प्यारा देश !


कुछ भूखे हैं कुछ गरीब है,
भीख मांगना जिनका नसीब है,
यह दुनिया भी अजीब है,

इनमें बसता है हमारा देश,
यह है हमारा प्यारा देश !






12 comments:

अमिताभ श्रीवास्तव said...

जब देश प्यारा हो तो उसकी हर चीज प्यारी लगने लगती है। रूखी-सूखी रोटी भी अमृत सी होती है। आपकी रचना देश पर है और यही वजह है कि वो भी बहुत प्यारी लगी।

मोहन वशिष्‍ठ 9988097449 said...

is post me aapne apne dil me deshbhakti ke priti jo shradh dikhai hai vo aap aur ham sabhi ke liye gaurav ki baat hai behad hi behatrin rachna babli ji jai hind jai bharat

Apanatva said...

nice poem .

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

is desh ki har cheez pyaari hai babli ji!!

दिगम्बर नासवा said...

बच्चों की खिलखिलाहट से,
पंछियों की चहचहाहट से,
युवाओं की मुस्कुराहट से,...

इन सब में बस्ता है हमारा देश ....... सच है हम तो ऐसा ही देखते हैं अपने देश को ............. अच्छी रचना है ..........

Unseen Rajasthan said...

Desh Bhakti ko itne ache vicharo me prastut karne par apko badhai !!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अपने देश की झलक का
आपने निष्पक्षता से वर्णन किया है!

बहुत सुन्दर रचना है!

Dr.Aditya Kumar said...

कुछ भूखे हैं कुछ गरीब है,
भीख मांगना जिनका नसीब है,
यह दुनिया भी अजीब है,
इनमें बसता है हमारा देश.
this is reality of our society;

Parul said...

sundar chitran :)

संजय भास्कर said...

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

संजय भास्कर said...

हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

M VERMA said...

अपने प्यारे देश का दर्शन खूबसूरती से किया है आपने
बहुत सुन्दर