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Sunday, December 12, 2010


क़ाश

क़ाश ये दिल यूँ उदास होता,
तुमसे मिलकर यादों में खोया होता,
दिल में इतना हमारे प्यार होता,
तुम्हारे लिए मन बेक़रार होता !


तुम्हें जाने का कोई गम नहीं है,
प्यार दिया तुमने जितना वो कम नहीं है,
जाने आँखें क्यूँ नम है मेरी,
रोकना चाहूँ खुदको पर रूकती ही नहीं !


चेहरा तुम्हारा रहता हैं आँखों में हरदम,
नाम लबों पर और कहती है धड़कन,
तुम्हारा हमारा ये कैसा है बंधन,
अजनबी होकर क्यूँ लगते हो मेरे हमदम !


मिल कर भी तुमसे मिल चुकी हूँ,
लगता है जैसे बरसों से तुम्हें जानती हूँ,
सबके साथ रहकर मैं
तन्हा महसूस करती,
अपने मन की बात किसीसे कह नहीं पाती !


40 comments:

Akshita (Pakhi) said...

यह तो बहुत सुन्दर कविता है.

पाखी की दुनिया में भी आपका स्वागत है.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत सुन्दर भावनात्मक कविता !

P S Bhakuni said...

दिल में इतना हमारे प्यार न होता,
तुम्हारे लिए मन बेक़रार न होता !...
बहुत सुन्दर कविता.

A said...

It is so nice. Really nice.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

क्या बात है सबकुछ कह दिया और यह भी कह दिया कि मन की बात किसी से कह नहीं पाती!!
बहुत सुंदर!!

arvind said...

क़ाश ये दिल यूँ उदास न होता,
तुमसे मिलकर यादों में खोया न होता,
दिल में इतना हमारे प्यार न होता,
तुम्हारे लिए मन बेक़रार न होता ......bahut khoobasoorat lavj.

दिगम्बर नासवा said...

चेहरा तुम्हारा रहता हैं आँखों में हरदम,
नाम लबों पर और कहती है धड़कन,
तुम्हारा हमारा ये कैसा है बंधन,
अजनबी होकर क्यूँ लगते हो मेरे हमदम ...

इसी को इश्क़ की शुरुआत कहते हैं ... जबरदस्त लिखा है ...

Kunwar Kusumesh said...

बबली जी,
इतना सब तो तब होता है जब किसी को किसी से प्यार हो जाता है.
कही कोई प्यार व्यार का चक्कर तो.............
आपने इस बार तो बहुत बहुत बहुत ही सुन्दर लिखा है .बधाई आपको.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

चेहरा तुम्हारा रहता हैं आँखों में हरदम,
नाम लबों पर और कहती है धड़कन,
तुम्हारा हमारा ये कैसा है बंधन,
अजनबी होकर क्यूँ लगते हो मेरे हमदम !
वाह...
बहुत सुन्दर कविता है, बधाई.

Abhilash Pillai said...

that was great.. with a slight twist and turn it will be a perfect love letter... :)

it is something like in the movie jab we met... "tumhe maalum hain tumpe toh koi bhi ladki fida ho sakti hain"...

Nice one babli

Kailash C Sharma said...

न मिल कर भी तुमसे मिल चुकी हूँ,
लगता है जैसे बरसों से तुम्हें जानती हूँ,

प्रेम की कोमल भावनाओं से परिपूर्ण सुन्दर अभिव्यक्ति...

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

प्रेममयी भावों की सुंदर अभिव्यक्ति

Ankur jain said...

sundar kavita...

adil farsi said...

बहुत सुन्दर रचना है

शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है - पधारें - पैसे का प्रलोभन ठुकराना भी सबके वश की बात नहीं है - इस हमले से कैसे बचें ?? - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

bahut badhiya babli jee!

sheetal said...

pyaar dil main jab gehra hota hain,
to isi tarah yeh man udaas hota hain.
na mil sakoge hume tum, yeh jaante hain.
fir bhi tumhe paane ke liye ye dil
bekraar hota hain.

aapne bahut sundar kavita likhi hain.
isi tarah likhte rahiye.

माधव( Madhav) said...

बहुत सुन्दर कविता

हरीश प्रकाश गुप्त said...

बहुत सुन्दर।

संजय भास्कर said...

आदरणीय बबली जी,
नमस्कार !
..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

संजय भास्कर said...

शब्द जैसे ढ़ल गये हों खुद बखुद, इस तरह कविता रची है आपने।
"माफ़ी"--बहुत दिनों से आपकी पोस्ट न पढ पाने के लिए ...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बहुत सुंदर कविता। बधाई।

---------
दिल्‍ली के दिलवाले ब्‍लॉगर।

Akanksha~आकांक्षा said...

खूबसूरत अहसास...सुन्दर कविता ...बधाई.

'सप्तरंगी प्रेम' के लिए आपकी प्रेम आधारित रचनाओं का स्वागत है.
hindi.literature@yahoo.com पर मेल कर सकती हैं.

Apanatva said...

sunder abhivykti..ehsaso kee.

Mukesh Kumar Sinha said...

kaun hai wo???:)

bahut pyari rachna....isq ki shuruat hai ya yaad, ye to aap kahengi..:)

Mukesh Kumar Sinha said...

babli jee kabhi hamare blog pe aayen..

संजय भास्कर said...

इसी को इश्क़ की शुरुआत कहते हैं ... जबरदस्त लिखा है ...
..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती
"माफ़ी"--बहुत दिनों से आपकी पोस्ट न पढ पाने के लिए ...

Swarajya karun said...

नाज़ुक भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति.

JHAROKHA said...

babli ji
bahut bahut hi sundar aur pranay bhare bhavnaao ki behatreen prastuti.

न मिल कर भी तुमसे मिल चुकी हूँ,
लगता है जैसे बरसों से तुम्हें जानती हूँ,
सबके साथ रहकर मैं तन्हा महसूस करती,
अपने मन की बात किसीसे कह नहीं पाती !
bahut hi khoobsurat,bilkul aapki tarah--;)
marry christmas
poonam

डॉ. नूतन - नीति said...

नए साल पर हार्दिक शुभकामना .. आपकी पोस्ट बेहद पसंद आई ..आज (31-12-2010) चर्चामंच पर आपकी यह रचना है .. http://charchamanch.uchcharan.blogspot.com.. पुनः नववर्ष पर मेरा हार्दिक अभिनन्दन और मंगलकामनाएं |

संजय भास्कर said...

नव वर्ष 2011
आपके एवं आपके परिवार के लिए
सुखकर, समृद्धिशाली एवं
मंगलकारी हो...
।।शुभकामनाएं।।

जयकृष्ण राय तुषार said...

satya ahinsha sadagi rahe pyar ke sang.rahe aapke blog par indradhanush ka rang.pure parivar ko kangaruon ke desh me mery shubhkamnayen.wish you a happy new year

सतीश सक्सेना said...

बहुत खूब ...शुभकामनायें आपके लिए !

aaryan said...

बेहतरीन

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

babli ji bahut dino se aapne kuch naya post nahi kiya.....ho jaye kuch naya...:))

neelima garg said...

nice poem...

Dilbag Virk said...

ati sunder
---sahityasurbhi.blogspot.com

Harman said...

nice,,really love the poem!

swapneshchauhan said...

bahut sundar...

artijha said...

bahut khubsurat hai aapki ye kabita...utni hi jitni aap khud ho...