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Tuesday, September 22, 2009



प्यारी सी पंछी

खड़ी थी अपने घर के आंगन में,
नीले नीले आसमान को देखते हुए,
चारों तरफ़ हरियाली छाई हुई थी,
मन मेरा खुशी से झुमने लगा था !


मैं देख रही थी सुंदर पंछियों को,
तभी आकर मेरे सामने बैठा एक मीठा सा पंछी,
मैं उसकी ओर देखती रही और वो मुझे भी,
पल भर में लगा की उसने बहुत कुछ कह दिया!


मैं अपने अकेलेपन को दूर करने चली थी,
अब उस पंछी से मेरी दोस्ती हो गई,
सोचा था कभी ऐसा दोस्त मिलेगा,
उस छोटे से नन्हे पंछी से मुझे तमाम खुशियाँ मिल गई !


25 comments:

Nirmla Kapila said...

ये पक्षी शायद इन्सान से भी अच्छे दोस्त होते हैं बहुत अच्छी कविता है बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

"अब उस पंछी से मेरी दोस्ती हो गई,
न सोचा था कभी ऐसा दोस्त मिलेगा,
उस छोटे से नन्हे पंछी से
मुझे तमाम खुशियाँ मिल गई !"

पंछी को प्रतीक मान कर आपने बहुत सुन्दर रचना
प्रस्तुत की है।
बधाई!!

Mithilesh dubey said...

बहुत खुब बबली दीदी। आपने पक्षियों को लेकर जो अभिव्यक्ति प्रस्तुत की वह काबिले तारीफ है। बहुत-बहुत बधाई

शोभना चौरे said...

sach ye panchi manv jeevan ko khoob khushi de jate hai .
bhut pyari kavita

Gurinder Singh Kalsi said...

Respected Babli ji, Pakshion ke saath baatcheet achhi lagi.Beautiful poem.

Sanjeet Tripathi said...

sundar

Mahesh Sindbandge said...

Beautiful...

you have that thing of expressing your feelings very well :)

Keep it up...

Keep penning them down :)

lalit sharma said...

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं, लेखन कार्य के लिए बधाई
यहाँ भी आयें आपके कदमो की आहट इंतजार हैं,
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creativekona said...

बब्ली जी ,
कमाल है---आप इतनी अच्छी कवितायें भी लिख रही थीं--और आपने इन्हें अभी तक छिपा के रखा था।
बहुत अच्छी लगी आपकी कवितायें।
नये ब्लाग की हार्दिक शुभकामनायें।
हेमन्त कुमार

Unseen Rajasthan said...

Another Lovely post !! This Poem is beautiful !!Unseen Rajasthan

भूतनाथ said...

are vaah....maine to aapki kaviaatyen pahle kabhi nahin dekhi....aur aaj jab dekhin....to muhn se nikal padaa....are vaah...babli.....!!kamaal...!!

भूतनाथ said...

अरे वाह पहले तो मैंने आपकी कवितायें देखी ही ना थी....और आज जब देखी तो मुहं से निकल ही पडा....अरे वाह....ये तो कमाल की हैं ....बबली....!!

श्यामल सुमन said...

पंछी को माध्यम बनाकर सफलतापूर्वक आपने अपने मन की बात कही।

radhasaxena said...

Bahut sundar.

Amit K Sagar said...

नए chitthe par आपका हार्दिक स्वागत है. सतत लेखन के लिए शुभकामनाएं. जारी रहें.

---
bahut sundar kavitaa likhee hai.
---
Till 30-09-09 लेखक / लेखिका के रूप में ज्वाइन [उल्टा तीर] - होने वाली एक क्रान्ति!

रचना गौड़ ’भारती’ said...

आपका लेखन बहुत उम्दा लगा। बोलने वालों से मूक दोस्त वफादार होते हैं। ब्लोग पर मिलते रहें तो हम भी दोस्त बनें रहेंगें।

हितेंद्र कुमार गुप्ता said...

Bahut Barhia... aapka swagat hai... isi tarah likhte rahiye...

thanx
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सुलभ सतरंगी said...

उस छोटे से नन्हे पंछी को सलाम. दोस्ती को सलाम.

नारदमुनि said...

narayan narayan

चंदन कुमार झा said...

बहुत ही सुन्दर रचना बबली जी । लिखती रहे ।

संजय भास्कर said...

sach ye panchi manv jeevan ko khoob khushi de jate hai .
bhut pyari kavita

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्दर रचना बबली जी

शागिर्द - ऐ - रेख्ता said...

जय हो, जय हो........
परिंदे इंसानों से भी कहीं ज्यादा बेहतर दोस्त होते हैं लेकिन कब उड़ जाएँ , भरोसा नहीं , इसलिए सोच समझकर दोस्ती कीजियेगा
सुंदर रचना |
जय हो........

क्रिएटिव मंच said...

आपको पढ़कर अच्छा लगा
शुभकामनाएं


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Manoj Bharti said...

सुंदर भाव अभिव्यक्ति ...
इंसान इन छोटे-छोटे अनुभवों में ही
वह आनंद पाता है जो दुनिया की कोई
दौलत नहीं दे सकती ।

हमारे साथ इन भावों को बाँटने के लिए धन्यवाद !

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