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Wednesday, March 9, 2011


उम्मीद

उम्मीदों की रोशनी से,
दामन भरा था मेरा !

जिसे चाहा था खुदसे ज़्यादा,
उसने तोड़ दिया अपना वादा !

रात दिन जिसके आने की उम्मीद करती,
उसे एक पल भी मेरी याद आती !

जिसका ख़्वाब हर पल देखती थी,
हो गया ओझल कुछ इस तरह !

वफ़ा का सिला उसने ऐसा दिया,
दिल रो रोकर बेहाल हो गया !

क़ाश उसके आने की उम्मीद करती,
आज मैं ख़ुदको तन्हा पाती !

बस कमी थी अगर कोई,
तो साथ नहीं था उसका !

सामने कश्ती थी और,
साहिल छूट गया मेरा !

31 comments:

Abhilash Pillai said...

that was a touching one...nice presentation...

I used to read such kavitha in Anitha mam's class. Now through your blog... :)

ktheLeo said...

वाह! सुन्दर रचना!

arvind said...

सामने कश्ती थी और,
साहिल छूट गया मेरा ...gahari chot khayee lagti hain....sundar rachna.

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

bablee ji / Urmi ji ... kaafi samay baad aap blog jagat me aayin hai... post 25 dec ke baad aaj hai... par kamaal kee hai... kal charchamnach par aapki yah post hogi... aap vahan aa kar apne vichaaron se anugrahit kijiyega... dhanyvaad

सुलभ said...

इक अनजाना सा डर और उम्मीद की किरण... इसी पर जीवन डोर टिका है.
- हेडर कविता ने विशेष आकर्षित किया.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

उम्मीद अभी भी बनाये रखें ....बहुत दिन बाद कोई पोस्ट आई है आपकी ..

A said...

Babli,

Awesome poem. Where have you been for such a long time? Busy in compiling a book?

Beautifully written poem.

Kailash C Sharma said...

सामने कश्ती थी और,
साहिल छूट गया मेरा !

बहुत संवेदनशील प्रस्तुति..बहुत सुन्दर

Patali-The-Village said...

बहुत संवेदनशील प्रस्तुति|धन्यवाद|

nivedita said...

HI URMIJI
HOW ARE YOU?
DO YOU KNOW ANY MAGIC TO GET INTO MY HEART AND BRING MY FEELINGS OUT?? HERE?
WONDERFUL. I RELATE THIS TO ME:-)

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर भाव.... लम्बे समय बाद आपकी रचना पढने को मिली है :)

Kunwar Kusumesh said...

अरे, उर्मी जी आप कहाँ चली गयी थीं ? बहुत दिन आप नज़र ही नहीं आयीं.भई देखिये ये बात ठीक नहीं है.
और आपकी नई कविता में इतनी निराशा क्यों? कोई बात ज़रूर है जो आप बताना नहीं चाहतीं मगर कविता में आपके उदगार तो बता ही रहे हैं. आप ज़ियादा परेशान मत होइए,ये दुनिया ऐसी ही है.
आपकी कविता पढ़कर किसी का कहा हुआ एक शेर आपसे share करने का मन कर रहा है.शेर है;-
वफ़ा की राह में कितने गुनाह होते हैं.
ये उनसे पूछे कोई जो तबाह होते हैं.

Minakshi Pant said...

bahut khubsurat

पी.एस .भाकुनी said...

सामने कश्ती थी और,
साहिल छूट गया मेरा ..
ek antraal ke baad blog jagat main aapka haedik swagat hai,
धन्यवाद|

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

saamne kashti thee aur saahil chhoot gaya mera....
der aaye durust aaye!

मेरे भाव said...

फूल से फूल की तुलना. अति सुन्दर. विदेश में रहकर भी अपनी भाषा से ऐसा प्रेम. प्रशंसनीय.

जयकृष्ण राय तुषार said...

सुंदर भावों से सजी कविता लेकिन इतनी निराशा क्यों वो भी इतने दिनों बाद........

Dilbag Virk said...

बस कमी थी अगर कोई,
तो साथ नहीं था उसका !
bas yhi to vo kmi hai jo n jeene deti hai n marne

bhut achchhi kvita
bdhaai ho

sagebob said...

दिल लिखी गयी नज़्म.
दिल को छूती हुई.
सलाम.

Sadhana Vaid said...

संवेदना और दर्द से भरी एक भावपूर्ण रचना है ! इस पीड़ा की उम्र लंबी ना हो यही दुआ करती हूँ ! आपकी कविता दिल को छूकर उदास कर गयी ! मेरी शुभकामनायें स्वीकार करें !

VIJUY RONJAN said...

Sundar Rachana.

डॉ. हरदीप संधु said...

आपकी पोस्ट बहुत दिन बाद आई है !
सुन्दर रचना !

daanish said...

मन की भावनाओं को
बहुत प्रभावशाली शब्द दिए हैं ..
बहुत अच्छी कविता !

Sunil Kumar said...

सामने कश्ती थी और,
साहिल छूट गया मेरा !
is sher ko samajhna padega
tippani bad men ...

संजय भास्कर said...

Beautiful as always.
It is pleasure reading your poems.

संजय भास्कर said...

कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका
बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

संजय भास्कर said...

होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं.

Vijay Kumar Sappatti said...

bahut sundar rachna babli ji

man ko chooti hui aur man me basti hui..


badhayi sweekar kare..

---------

मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
"""" इस कविता का लिंक है ::::
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html

POOJA... said...

उम्मीद पे दुनिया कायम है...
बेहद भावुक रचना...

Mukesh Kumar Sinha said...

wah...pyari si rachna...:)
holi ki shubhkamnayen...

Amrita Tanmay said...

बहुत सुन्दर ,संवेदनशील प्रस्तुति...