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Monday, January 9, 2012

चाँदनी रात

चाँदनी रात,
महकी हुई फिज़ा,
रोशनी छायी !

प्रतिबिम्ब सा,
अद्भुत नज़ारा,
खोए हुए नयन !

प्रकाश छाये,
अँधेरा उज्जवल हो,
करूँ प्रतीक्षा !

जीवन मेरा,
तुम बिन अधूरा,
तन्हा-सा लगे !

देखूँ चाँद को,
रात गुज़र जाये,
खालीपन-सी !

सोचती रही,
बाहें फैलाये तुम,
कब आओगे !

गहरे पल,
ख़्वाब अधूरा रहा,
नशा-सा लगे !

चाँद का रूप,
तलाशती अँखियाँ,
बरस पड़ी !

30 comments:

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

bahut sundar kavita .. Haiku ka samayojan sa lag raha hai.. bahut sundar bhaav..

संगम "कर्मयोगी" said...

"प्रकाश छाये,
अँधेरा उज्जवल हो,
करूँ प्रतीक्षा !"
Adbhut bhaav hain...!
Swaagat hai:
http://isangam.blogspot.com/

SweetMelody said...

a visit to your blog, or are learning a lot
friendly to France
Chris


अपने ब्लॉग के लिए एक यात्रा है, या कर रहे हैं एक बहुत कुछ सीख
फ्रांस के लिए अनुकूल
Chris

veerubhai said...

विरह व्याकुल मुग्धा का शब्द चित्र .भोर होते कौन जाने छा गई कैसी उदासी ,क्या किसी की याद आई ,ओ विरह व्याकुल प्रवासी ......अभिसार को व्याकुल लेकिन मिलने में असमर्थ अभिशप्त नायिका का चित्र उकेरा है आपने इस रचना में .बधाई .

प्रेम सरोवर said...

आपकी भाव-प्रधान कविता अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट "लेखनी को थामा सकी इसलिए लेखन ने मुझे थामा": पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद। .

संध्या शर्मा said...

अधूरा ख्वाब, प्रतीक्षा... गहरे भाव

ऋता शेखर 'मधु' said...

बहुत सुंदर भाव भरे हैं कविता में...बहुत ही सुंदर!

dheerendra said...

वाह!!!!!चादनी रात महकी फिजा रोशनी छाई,
सुंदर अभिव्यक्ति बहुत बढ़िया रचना,....
welcom to new post --"काव्यान्जलि"--

सुबीर रावत said...

सोचती रही,
बाहें फैलाये तुम,
कब आओगे !

आपकी यह कविता 'हाइकु' के निकट है. प्रस्तुतीकरण का ढंग अद्भुत है. शब्द सयोंजन सुन्दर है. यदि अन्यथा न लें तो कहूँगा कि प्रिय के प्रति संबोधन कभी "तुझ" और कभी "तुम" थोड़ा अटकता है.

शुभकामनायें !!

बारामासा की नयी पोस्ट पर प्रतिक्रिया वांछनीय है.

chirag said...

romantic .....
super like

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही खुबसूरत भावो की रचना.....

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

chaandni raatein....

dinesh aggarwal said...

अन्य कविताओं की तरह,आपकी यह कविता भी
मुझे बहुत पसंद आई।
बधाई एवं आभार....

P.N. Subramanian said...

प्रतीक्षा.. अद्भुत अनुभूति होती है. बहुत सुन्दर.
http://mallar.wordpress.com

Kewal Joshi said...

अद्भुत रचना.

Amrita Tanmay said...

मनोहारी..मधुर सी रचना ..

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

प्रकृति से प्रतीक लेकर मनोभावों को सुंदरता से पिरोया गया है.बहुत खूब.संतुलित शब्द-रचना.

प्रेम सरोवर said...

बहुत सुंदर । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद ।

Ratan Singh Shekhawat said...

बढ़िया रचना
Gyan Darpan
..

sangita said...

जीवन मेरा,
तुम बिन अधूरा,
तन्हा-सा लगे !

देखूँ चाँद को,
रात गुज़र जाये,
खालीपन-सी !

बहुतसुन्दर पोस्ट है | शब्दों की तहजीब शानदार है|

somali said...

bahut sundar abhivyakti

A said...

As usual superb.

dheerendra said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति,बेहतरीन रचना
welcome to new post --काव्यान्जलि--यह कदंम का पेड़--

Adhi Das said...

a beautiful imagination..good work..best wishes..

Monika Jain "मिष्ठी" said...

sundar rachna..
मिश्री की डली ज़िंदगी हो चली

Naveen Mani Tripathi said...

vah bahut hi sundar abhivyakti ....badhai urmi ji

ASHOK BIRLA said...

so nice mem .....!!

vidya said...

बहुत सुन्दर..

रश्मि प्रभा... said...

swaabhawik sundar

Kewal Joshi said...
This comment has been removed by the author.