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Monday, January 16, 2012

आरज़ू

कहीं दूर वादियों में,
काश हम तुम होते,
बेपन्हा मोहब्बत की कशिश,
हम दोनों आँखों से कहते !


जो देखना चाहे हमें देखे,
करें हम किसीकी परवाह,
हम दोनों हो जाएँ चलो,
कुछ देर के लिए गुमराह !


आरज़ू थी तुमसे मिलने की,
तुम्हें पाया है हमने आज,
कैसे करूँ अपने ख़ुशी का इज़हार,
मेरा दिल झूम उठा है आज !


तुमसे दो घड़ी हुई जो बात,
लगा जैसे पाया है उम्रभर साथ,
हो जाएँ एक दूजे के इतने करीब,
सोचे हम क्या है हमारा नसीब !

36 comments:

dheerendra said...

खुबशुरत अहसासों की बहुत अच्छी प्रस्तुति,बेहतरीन पोस्ट
welcome to new post--काव्यान्जलि --हमदर्द-

vidya said...

beautiful and romantic..

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

आपकी कविताओं की खासियत उनकी मासूमियत होती है!! यह भी उसी श्रेणी में है!!

कुमार संतोष said...

Waah..!!
Bahut khoob, shaandaar.

Patali-The-Village said...

बहुत खूबसूरत कविता| धन्यवाद|

ऋता शेखर मधु said...

उम्दा प्रस्तुति...

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

khoobsoorat naseeb!!

Rakesh Kumar said...

प्रेम में मिलन पक्ष को बहुत खूबसूरती से प्रस्तुत किया है आपने.


जो देखना चाहे हमें देखे,
न करें हम किसीकी परवाह,
हम दोनों हो जाएँ चलो,
कुछ देर के लिए गुमराह !

ऐसा लगता है जैसे आत्मा का परमात्मा से
मिलन हो रहा हो.

शानदार प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.

क्षमा चाहता हूँ ,उर्मी जी देर से आ पाया आपके ब्लॉग पर.यहाँ सब कुशल से हैं.आपके कुशल मंगल की भगवान से प्रार्थना करता रहता हूँ.

अभी मकर सक्रांति पर आपके दूसरे ब्लॉग पर
नई पुरानी हलचल से आया था.

बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ आपको और आपके समस्त परिवार को.

दिगम्बर नासवा said...

एहसास बिखेरती सुन्दर रचना ...

प्रेम सरोवर said...

बहुत ही बढ़िया । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है ।

sushma 'आहुति' said...

मन के भावो को शब्द दे दिए आपने......

veerubhai said...

सुन्दर एहसास जगाती रचना .

संगम "कर्मयोगी" said...

Behad sundar aarju hai Urmiji:)
Visit my blog

Naveen Mani Tripathi said...

arju padhane ke bad ....badhai dene ke liye bhi ....aarju ho hi gayee ...badhai urmi ji .

Rohit said...

short and beautiful!!

सतीश सक्सेना said...

प्यार की निश्छल अभिव्यक्ति...

Chirag Joshi said...

romantic and lovely poem
really touching....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
आरजू ऐसी ही होती है।

Maheshwari kaneri said...

मासूम जज्बातो की खूबसूरत अभिव्यक्ति...सुन्दर..

Naveen Mani Tripathi said...

URMI JI APKI RACHANA ME DARD YUN HI CHHALK JATA HAI .....GAZAB KI PRASTUTI ...BADHAI ......MERE NAYE POST PR AMANTRAN SWEEKAREN

faseela said...

Dear,
In your recipe blog i am not able to comment....its getting hanged up...Please can u change the setting of comment box to pop up window....
thank u so much dear...


U have got so many lovely blogs....great

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत सुन्दर रचना है।

dinesh aggarwal said...

आदरणीय उर्मी जी, क्षमा माँगते हुए सादर प्रणाम।
नेट में खराबी होने के कारण आपके ब्लॉग पर नहीं
आ सका।
आपकी कविता बहुत ही सुन्दर है। खासतौर पर अंत
की पंक्तियाँ तो लाजबाव हैं। नश्चित ही सराहनीय।
क्या यही गणतंत्र है

जयकृष्ण राय तुषार said...

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ |

veerubhai said...

दो घड़ी वो जो पास ,आ बैठे ,
हम ज़माने से दूर ,जा बैठे .ऐसा ही होता है इजहारे मोहब्बत में अच्छी प्रस्तुति रही आपकी .

ashok andrey said...

prem ko jis tarah chhuaa hai aapne, adbhut hai. itni sundar prastuti ke liye badhai

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

पहली बार आया आपके ब्लॉग पर शायद । अच्छा लगा । प्यार के संवेदनाओं से सजी सुन्दर रचना ।
बसंत पंचमी और माँ सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ । मेरे ब्लॉग "मेरी कविता" पर माँ शारदे को समर्पित 100वीं पोस्ट जरुर देखें ।

"हे ज्ञान की देवी शारदे"

dinesh aggarwal said...

तुमसे दो घड़ी हुई जो बात,
लगा जैसे पाया है उम्रभर साथ,
मासूम सादगी.....सराहनीय.....

ऋता शेखर मधु said...

भावपूर्ण और प्यारी कविता|

संजय भास्कर said...

कमाल की अभिव्यक्ति, पढ़ते पढ़ते मंत्रमुग्ध हो गया, बहुत सुन्दर, बेहतरीन, लाजवाब!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

आपली लाविताएं अनोखी होती हैं.. बहुत अच्छी!

Kewal Joshi said...

'विरह - व्यथा' की भावपूर्ण अभिव्यक्ति - बधाई.

संध्या शर्मा said...

तुमसे दो घड़ी हुई जो बात,
लगा जैसे पाया है उम्रभर साथ,
वाह... दो घडी ही काफी है सुख की... खूबसूरत अहसास

Bharat Bhushan said...

मेरा विचार है कि यह कविता फिल्म में गीत की तरह प्रयोग की जा सकती है. बहुत खूब लिखा है.

Bhagirath Kankani said...

बहुत सुंदर प्रस्तुती। मेरे ब्लॉग http://santam sukhaya.blogspot.com पर आपका स्वागत है. अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराये, धन्यवाद

मदन मोहन सक्सेना said...

बहुत सुंदर ! जितनी सार्थक रचना उतनी ही कलात्मक ! शुभकामनायें !
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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