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Tuesday, January 31, 2012

तस्वीर

समय की शिला पर मधुर चित्र बसे,
किसी ने बनाये किसी ने मिटाया उसे !

किसी ने लिखी आँसूंओं से कहानी,
किसी ने बहाया उसमें दो बूँद पानी !

इसी में बीत गए दिन ज़िन्दगी के,
रंगों-भरी तस्वीर बेरंग-सी लगे !

विकल सिन्धु की लहर रुके कभी,
धरा उठाये, गगन गिराए उसे !

प्रणय-पंथ पर प्राण के दीप कितने,
मिलन ने जलाये, विरह ने बुझाये इतने !

नयन-प्राण में रूप के स्वप्न जितने,
निशा ने जगाये, उषा ने सुलाए उतने !


36 comments:

Anupama Tripathi said...

नयन-प्राण में रूप के स्वप्न जितने,
निशा ने जगाये, उषा ने सुलाए उतने !



बहुत गहन ...सीधे ह्रदय तक पहुंची है ...
बहुत ही सुंदर भावप्रबल रचना ....
EXCELLENT ......!!!!

ऋता शेखर 'मधु' said...

रचना और विध्वंस को एक साथ उकेरने में पूरी तरह सफल है यह कविता...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

आपकी कविताओं में दिनोदिन निखार आता जा रहा है!! यह कविता प्रभाव छोड़ जाती है दिल पर!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

सुन्दर तस्बीर, सुन्दर रचना!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

विरोधाभास को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं ..अच्छी प्रस्तुति

रश्मि प्रभा... said...

विकल सिन्धु की लहर न रुके कभी,
धरा न उठाये, गगन न गिराए उसे !... bhawpurn

vidya said...

किसी ने लिखी आँसूंओं से कहानी,
किसी ने बहाया उसमें दो बूँद पानी !

बेहतरीन रचना...
सुन्दर!!!

Maheshwari kaneri said...

किसी ने लिखी आँसूंओं से कहानी,
किसी ने बहाया उसमें दो बूँद पानी !.....बहुत खूबसूरत भाव..

संजय भास्‍कर said...

... बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति है ।
बेहतरीन भाव लिए सुंदर कविता..बधाई

Amrita Tanmay said...

बहुत सुन्दर अहसास..सशक्त प्रस्तुति..

Yashwant Mathur said...

बेहतरीन।


सादर

दिगंबर नासवा said...

नयन-प्राण में रूप के स्वप्न जितने,
निशा ने जगाये, उषा ने सुलाए उतने ...

बहुत उम्दा प्रस्तुति ... गहन ...

Rakesh Kumar said...

प्रणय-पंथ पर प्राण के दीप कितने,
मिलन ने जलाये, विरह ने बुझाये इतने !

बेहतरीन लाजबाब प्रस्तुति.
शब्द और भावों की सुन्दर तस्वीर प्रस्तुत
की है आपने.

Shilpa Mehta : शिल्पा मेहता said...

अच्छी प्रस्तुति ...

मधुर चित्र मिट जाते हैं, परन्तु कडवे चित्र ?

sushma verma said...

इसी में बीत गए दिन ज़िन्दगी के,
रंगों-भरी तस्वीर बेरंग-सी लगे ! प्रेरक और प्रभावशाली खुबसूरत रचना.....

Unknown said...

लाजवाब अभिव्यक्ति ..

सहज साहित्य said...

प्रणय-पंथ पर प्राण के दीप कितने,
मिलन ने जलाये, विरह ने बुझाये इतने !-बहौत भावप्रवण पंक्तियां , हृदय को छूती हुई लहरों की तरह ।

Naveen Mani Tripathi said...

नयन-प्राण में रूप के स्वप्न जितने,
निशा ने जगाये, उषा ने सुलाए उतने

bahut khoob urmi ji behad sundar ghazal ke liye badhai .

Anamikaghatak said...

ap bahut achchha likhti hai....ati uttam

मेरा साहित्य said...

विकल सिन्धु की लहर न रुके कभी,
धरा न उठाये, गगन न गिराए उसे !
bah bahut koob
rachana

dinesh aggarwal said...

बहुत सुन्दर मगर सच है
लिखी अश्कों से कोइ रचना
बहा दे व्यर्थ में ही कोइ
है निश्चित आपकी रचना
बधाई के लिये उपयुक्त
नेता,कुत्ता और वेश्या

Kailash Sharma said...

प्रणय-पंथ पर प्राण के दीप कितने,
मिलन ने जलाये, विरह ने बुझाये इतने !

...बहुत खूब! सृजन और विध्वंश के विरोधी भावों का बहुत सुन्दर चित्रण...

Mamta Bajpai said...

खूबसूरत है

G.N.SHAW said...

" निशा ने जगाये, उषा ने सुलाए उतने !" बहुत ही सुन्दर जीवन के सारांश

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

कोमल शब्द,बढ़िया रचना..

संतोष त्रिवेदी said...

मिलन विरह से अधिक आनंद देता है कभी !

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

वाह!!!!!बहुत सुंदर भाव की अच्छी रचना.

NEW POST....
...काव्यान्जलि ...: बोतल का दूध...
...फुहार....: कितने हसीन है आप.....

somali said...

नयन-प्राण में रूप के स्वप्न जितने,
निशा ने जगाये, उषा ने सुलाए उतने !

bahut sundar prbhavtpadak rachna....

सदा said...

बहुत खूब
कल 08/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, !! स्‍वदेश के प्रति अनुराग !!

धन्यवाद!

गिरधारी खंकरियाल said...

ati utam ! bilamb se padhne ke liye kshama chahta hun.

मेरा मन पंछी सा said...

बेहद सुंदर प्रभावशाली और बेहतरीन रचना...

Ruma-power said...

किसी ने लिखी आँसूंओं से कहानी,
किसी ने बहाया उसमें दो बूँद पानी !

सुंदर कविता...

wgcdrsps said...

this poem is written by famous poet Shambhunath Singh. Only a few words have been changed and .the whole poem is copied as such. This is most unethical.

wg cdr SP Shukla

wgcdrsps said...

this poem is written by famous poet Shambhunath Singh. Only a few words have been changed and .the whole poem is copied as such. This is most unethical.

wg cdr SP Shukla

tbsingh said...

sunder ghazal

कंचनलता चतुर्वेदी said...

समय की शिला पर.........?