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Friday, August 20, 2010


खाली सा कुछ

यूँ तो गुज़र रहा है हर एक पल ख़ुशी के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ !

हर लम्हा है हसीन, नयी दिलकशी के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ !

रिश्ते वफ़ायें चाहत सब कुछ है साथ,

फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ !

आँखों में है ख़्वाब, लबों पे हँसी है साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ !

दिल को नहीं है कोई शिकायत किसी के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ !

कुदरत भी मेहरबान है दरियादिली के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ !

24 comments:

P S Bhakuni (Paanu) said...

....कुदरत भी मेहरबान है दरियादिली के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ...
sunder rachna hetu abhaar...kuch bilam se hi sahi aapko swatantrta diwas ki hardik badhai or rakshabandhan ki badhai in advance....

Mukesh Kumar Sinha said...

fir bhi koi kami se kyon hai jindagi me...........:)
bahut khub babli jee......shandaar rachna........
waise bahuto ki jindagi me bahut saareee kamiyan hoti hai......:)
so keep it up!!

मनोज कुमार said...

बेहद प्रभावशाली!

Deepak Shukla said...

Hi...

Etni kami to hai rahi..
har kisi ke saath...
Khushiyon ke sang gam bhi..
hote sada hain saath...

Sundar kavita...

Deepak

विजयप्रकाश said...

वाह...आपकी यह रचना मन को छू गई.सच है हम सबको सब कुछ रहते भी कई बार ऐसे लगता है जैसे कुछ कमी सी रह गई है.बड़ी खूबी से आपने हम सबके भावों को शब्दों में ढाला है.

महफूज़ अली said...

सच में आपकी रचनाएँ तो दिल को छू लेती हैं...

विजय प्रकाश सिंह said...

बहुत अच्छी कविता है लेकिन जल्दी खत्म हो गयी । मेरा मतलब है कि थोड़ा और बढ़ाते तो अच्छा रहता ।

राजेश उत्‍साही said...

बबली जी आपके ब्‍लाग के परिचय में जो कविता आपने लगाई है। उसकी पहली ही पंक्ति क्‍या आपको खटकती नहीं है। फूल की नजर फूल पर जमा दिया।
आप इतना सुंदर लिखती हैं। यहां यह जैसे चावल में कंकड़ की तरह ही नजर आती है।

मेरा सुझाव है यह पंक्ति कुछ इस तरह हो सकती है-
फूल ने फूल को चुरा लिया

शिवम् मिश्रा said...

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी कविता।

रानीविशाल said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .....शुभकामनाए !
बूढी पथराई आँखें .....रानीविशाल

वन्दना said...

शानदार अभिव्यक्ति…………………बस यही एक ख्याल कचोटता रहता है कि कोई कमी सी क्यों है।

Udan Tashtari said...

अच्छा है...

संजय भास्कर said...

शानदार अभिव्यक्ति………

संजय भास्कर said...

बेशक बहुत सुन्दर लिखा और सचित्र रचना ने उसको और खूबसूरत बना दिया है.

Nisha said...

:) :).. just smile!! thanks.

Shekhar Suman said...

bahut hi khubsurat rachna.....
umdaah prastuti...
mere blog par is baar..
पगली है बदली....
http://i555.blogspot.com/

sada said...

यूँ तो गुज़र रहा है हर एक पल ख़ुशी के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ !

हर लम्हा है हसीन, नयी दिलकशी के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ !

बहुत ही गहरे भाव दिये हैं आपने हर पंक्ति में, बेहतरीन शब्‍द रचना ।
मेरे ब्‍लाग पर आपका आना, और प्रोत्‍साहन सदैव प्रोत्‍साहित करता है ।

सुनील गज्जाणी said...

कुदरत भी मेहरबान है दरियादिली के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ !उर्मी जी ,
प्रणाम !
ऊपर का शेर आप कि नज़र है . खूब सूरत रचना के लिए आप को बधाई ,
साधुवाद

A said...

Very nice....made me sad though

सुधीर said...

बहुत खूब!

Manish Pandey said...

bahoot achchi gazal hai, dard ko bayan karna bhi ek kala hai...

mridula pradhan said...

bahot sunder.

Sandip Sital said...

बहुत सुन्दर !