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Tuesday, September 14, 2010


हिन्दी दिवस

हम हिन्दी दिवस गर्व और उलास के साथ मनाते हैं,
हिन्दी में कार्य करने का संकल्प दोहराते हैं !

शान से हम सब हिन्दी प्रेमी कहलाते हैं,
सच्चे मन से हर देशवासी हिन्दी भाषा को पूजते हैं !

हिन्दी में हर काम करने में गर्व महसूस करते हैं,
हिन्दी में निरंतर अभ्यास जारी रखते हैं !

हर कठिनाइयों को दूर करने की ठान लेते हैं,
हिन्दी भाषा में ज्ञान प्राप्त करने की सोचते हैं !

विदेशी हमारी हिन्दी भाषा सिखने में उत्सुक रखते हैं,
हम अपनी हिन्दी भाषा पर फक्र महसूस करते हैं !

आओ हम सब मिलकर हिन्दी दिवस की सम्मान करें,
हिन्दी भाषा के प्रति प्यार हर देशवासी के दिल में रहे !

लाखों लोग हुए हमारे देश के लिए कुर्बान,
अपने देश और भाषा को होने देंगे बदनाम !

अपने देश के प्रति प्यार और भावना सदा बढ़ाएं,
सब मिलकर हिन्दी दिवस का सम्मानित करें !

25 comments:

P S Bhakuni (Paanu) said...

......हिंदी दिवस की ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं. i

वीना said...

हिंदी दिवस पर शुभकामनाएं, अच्छी प्रस्तुति...

P.N. Subramanian said...

सुन्दर भावनाएं. बड़े खेद की बात है की हिंदी को हिंदी दिवस तक ही समेट रखने की साजिश भी चहुँ और दिखलाई देती है.

Abhilash Pillai said...

waah ustad waah... maan gaye, aapko bhi aur aapki kavita ko bhi...

Apko hindi divas ki hardik subhkamnaye...

Aapki kavita mein zor hain or zosh bhi... kamar kar diya

mein is kavita rupi naav mein nirantar yatra karna chahunga...

Good one Babli

arvind said...

अपने देश के प्रति प्यार और भावना सदा बढ़ाएं,
सब मिलकर हिन्दी दिवस का सम्मानित करें !
........हिंदी दिवस पर शुभकामनाएं.

Dr. Ashok palmist blog said...

आपको हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनायेँ। हिन्दी को समर्पित बहुत ही प्यारी कविता लिखी हैँ आपने। आभार! -: VISIT MY BLOG :- जिसको तुम अपना कहते हो ........कविता को पढ़कर अपने अमूल्य विचार व्यक्त करने के लिए आप सादर आमंत्रित हैँ। आप इस लिँक पर क्लिक कर सकती है

राज भाटिय़ा said...

मेरे लिये तो हर दिवस ही हिन्दी दिवस है, धन्यवाद

संजय भास्कर said...

नमन हमारा भी हिन्दी को ... राष्ट्र भाषा को ...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

हिंदी दिवस के समारोह में हम भी बिजीथे, एही से आज लिख रहे हैं...

Deepak Shukla said...

Hi...

Hindi hain hum vatan hain...
Hindostan humara...

Deepak..

Sunil Kumar said...

हिंदी भाषा को नमन और सुंदर रचना के लिए आपको बधाई

Sulagna Mukherjee Basu said...

Beautiful one !!

Best Regards
Sulagna
http://e-senseofspicenfragrance-sulagna.blogspot.com/

Shaivalika Joshi said...

Hindi Diwas ki Badhayiyaan.........

चौपटिया ROCKS said...

par sirf hindi divas k din he kyon. mujhay to lagta hai ki hindi divas raaj bhasha adhikaariyon ka ak oupchaarik utsav hai jinho nay hindi ko kathin aur dushkar banaakar bhaasha ka khoob beda gark kiya hai...

A said...

THANK YOU FOR TELLING ME ABOUT HINDI DAY. I WOULD HAVE NEVER FOUND OUT.

AS USUAL BEAUTIFUL POEM.

CONGRATULATIONS FOR CONSTANTLY BRINGING BEST OF THE BEST POEMS HERE ON YOUR BLOG.

I MENTIONED BEFORE, BUT ONE MORE TIME, IF YOU EVER COMPILE YOUR POEMS IN A BOOK, I WILL BE THE FIRST ONE TO BUY THAT BOOK.

शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

Sonal said...

ek umda post...

Mere blog par bhi sawaagat hai aapka.....

http://asilentsilence.blogspot.com/

http://bannedarea.blogspot.com/

ek Music Blog ka link share kar rahi hun hope you like...
Download Direct Hindi Music Songs And Ghazals

Akshita (Pakhi) said...

हिंदी पर कित्ती प्यारी कविता...बधाई.
_____________________________
'पाखी की दुनिया' - बच्चों के ब्लॉगस की चर्चा 'हिंदुस्तान' अख़बार में भी.

neelima garg said...

sundar kavita....

Asha said...

हिन्दी दिवस पर बहुत बहुत बधाई |
आशा

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

आपको भी हार्दिक बधाई।
---------
ब्लॉगर्स की इज्जत का सवाल है।
कम उम्र में माँ बनती लड़कियों का एक सच।

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

Susmita Biswas said...

Hindi dibose hindusthani r nomoskar

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

पतझड़ का मौसम है,
सुन्दर सुमन कहाँ से लाऊँ मैं।
वीराने मरुथल में कैसे,
चम्पा को महकाऊँ मैं।।

अमलेन्दु उपाध्याय said...

"यूरोप के नारी-स्वातंत्र्य को भारतीय परिवेश में लागू नहीं किया जा सकता। आदिवासी, दलित, निम्न जातियों की स्त्रियों की पीडा को समझने के लिए अलग नजरिए से चीजों को देखना होगा। श्रमशील स्त्रियों की चिंताओं को आधुनिक विचार के दायरे में लाना होगा। हालांकि इन स्त्रियों के उध्दार के लिए कोई अलग से रूप-रेखा समाज में दिखाई नहीं देती"
[वरिष्ठ कवि लीलाधर मंडलोई के साथ चन्दन राय की बातचीत]
एक बार हस्तक्षेप.कॉम भी देखें
http://hastakshep.com