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Monday, September 27, 2010


एहसास

मेरा जीवन था बिखरा बिखरा,
बह निकला एक दरिया सा,
दिल में तुमने मुझे बसाया,
साथ हर मुश्किल में मेरा दिया !

एहसास हो तुम मेरे मन का,
धड़कन हो मेरी ज़िन्दगी का,
तुम सागर हो तुम साहिल भी,
तुम रास्ता भी और मंज़िल भी !

किस्मत से हम एक दूजे से मिले,
चलता रहे यूँ प्यार के सिलसिले,
जो दिल कहता वो तुम सुन लो,
तुम मेरे हो तुम मेरे हो !

ये जनम जनम के रिश्ते हैं,
सम्बन्ध प्यार से बनते हैं,
तुम्हारे बाहों में हमेशा रहूँ,
इस एहसास को जीवन भर पा सकूँ !

32 comments:

माधव said...

bahut sundar kavitaa

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

तुम सागर हो तुम साहिल भी,
तुम रास्ता भी और मंज़िल भी !
--
बहुत ही सुन्दर!

महेन्द्र मिश्र said...

किस्मत से हम एक दूजे से मिले,
चलता रहे यूँ प्यार के सिलसिले

रचना बढ़िया है ...

Sulagna Mukherjee Basu said...

Beautiful one !!

Best Regards
Sulagna
http://e-senseofspicenfragrance-sulagna.blogspot.com/

Shekhar Kumawat said...

तुम सागर हो तुम साहिल भी,
तुम रास्ता भी और मंज़िल भी !
--
bahut sundar

सहज साहित्य said...

बहुत प्यारी कविता है । ईश्वर ही रिश्ते बनाता है , जब चाहता है तब । एक -एक शब्द गहन अनुभूति और सरसता से सराबोर है ।

सम्वेदना के स्वर said...

अल्लाह आप की तमन्ना पूरी करे!

संजय भास्कर said...

ये अदा बड़ी अच्छी है ...चलो आशिक सा हो जाता हूं

दिल को छू गई आपकी ये रचना...बेहतरीन

संजय भास्कर said...

very nice ....really nice

P.N. Subramanian said...

सुन्दर रचना. रिश्ता तो केवल इसी जनम का है. आगे की कौन जाने. बोर हो जायेंगे.

राज भाटिय़ा said...

बहुत प्यारी ओर सुंदर कविता जी धन्यवाद

Shekhar Suman said...

bahut hi sundar rachna...
maza aa gaya...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत एहसास ..

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति !!

Swarajya karun said...

है यही आशा कि पूरी हो आपकी अभिलाषा. एक अच्छी कविता के लिए बधाई और शुभकामनाएं .

शरद कोकास said...

वाह अब तो आप लम्बी लम्बी कवितायें लिखने लगीं ।

sky-blue freak :D said...

Nice poem !!

डॉ. हरदीप संधु said...

सम्बन्ध प्यार से बनते हैं..
जब जब ईश्वर चाहता है तब ही रिश्ते बनाता है .

Udan Tashtari said...

अच्छा है बड़ी रचनाओं में भाव स्पष्ट उभर कर आते हैं..

शिवम् मिश्रा said...


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

Wah wah….khoobsoorat prastuti…!

राजकुमार सोनी said...

आपकी रचना को पढ़कर तुम मेरे हो फिल्म का गाना भी याद आया
बहुत ही शानदार

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बहुत ही प्यारी कविता लिखी है आपने, बहुत बहुत बधाई।

वीना said...

सुंदर रचना

खबरों की दुनियाँ , भाग्योत्कर्ष said...

सुन्दर ।

A said...

With your permission, I would like to print this one and present it. It is very nicely written. Of course with full credits to you.

If you okay, please email me at arealblogger@gmail.com

MUFLIS said...

आकाश तक फ़ैली
मन की ख्वाहिशों को
शब्दों में कहती हुई
सुन्दर रचना ....

विरेन्द्र सिंह चौहान said...

बहुत अच्छी रचना है ...
सुंदर-सरल शब्दों में
सार्थक प्रस्तुति ...
आभार

vedvyathit said...

urmi ji aap ne itna sneh diya hardik abhar hai aap videsh me sahity seva kr rhin hain sukhd hai
aap ke fool ke liye ye pnktiyan hain
bde sukomal fool hain murjhate bin bat
thodi si hi bhool dhoop se ho jate behal
us se bhi koml hridy fool ki kya aukat
fool se jo ghayl huaa us ka khan ilaj
dr. ved vyathit
email -dr.vedvyathit@gmail.com

anjana said...

अच्छी अभिव्‍यक्ति |

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बेहद ख़ूबसूरत और मर्मस्पर्शी रचना प्रस्तुत किया है आपने! इस बेहतरीन रचना के लिए बधाई!

Alok said...

good effort Urmi.:). Happy to see some lines of of my original poemgot good appreciation.

http://alokviews.blogspot.com/