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Tuesday, July 12, 2011


जी करता है

आके बैठो मेरे सिरहाने तुम,
और न सोचो कुछ बहाने तुम !

छूके देखूँ तो मानूँ मैं,
सच हो या ख़्वाब हो न जाने तुम !

आज भी हूँ मैं फ़िदा तुम पर,
क्या अब भी हो मेरे दीवाने तुम?

मेरी नज़रों में डालकर नज़रें,
ख़ुद ही पढ़लो सारे फ़साने तुम !

जी करता है रूठ जाऊँ मैं,
हँसके आ जाओ मनाने तुम !

मेरे सीने पे सर रखकर अपना,
यूँ न रहो बनकर बेगाने तुम !

32 comments:

Dr Varsha Singh said...

छूके देखूँ तो मानूँ मैं,
सच हो या ख़्वाब हो न जाने तुम !
आज भी हूँ मैं फ़िदा तुम पर,
क्या अब भी हो मेरे दीवाने तुम?


बहुत कोमल ...बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

जी करता है रूठ जाऊँ मैं,
हँसके आ जाओ मनाने तुम !

वाह.

Dr (Miss) Sharad Singh said...

जी करता है रूठ जाऊँ मैं,
हँसके आ जाओ मनाने तुम !
मेरे सीने पे सर रखकर अपना,
यूँ न रहो बनकर बेगाने तुम !


बहुत ही प्यारा मनुहार...कोमल सुंदर रचना...

Jyoti Mishra said...

awesome lines !!!
Loved it and enjoyed it.

Rakesh Kumar said...

आपकी भाव जगत की उडान अनुपम है बबली जी.
नरम नरम कोमल खूबसूरत अहसासों को जगाती हुई,
शब्दों में चेतना का संचार करती हुई.
मधुर स्वप्नों को बुनती हुई.
सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

पी.एस .भाकुनी said...

आके बैठो मेरे सिरहाने तुम,
और न सोचो कुछ बहाने तुम !........

सुंदर अभिव्यक्ति....

amrendra "amar" said...

आके बैठो मेरे सिरहाने तुम,
और न सोचो कुछ बहाने तुम !........

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

prerna argal said...

bahut khoob babliji .dil ke udagaron ko baakhubi bayaan kiya hai aapne.badhaai aapko.mere blog main aane ka shukriyaa.

vidhya said...

आके बैठो मेरे सिरहाने तुम,
और न सोचो कुछ बहाने तुम !........

सुंदर अभिव्यक्ति....

गिरधारी खंकरियाल said...

sirahne par sir bathne aur seene par sir rakhne ke baad to bahano ki gunjais hi nahi rah jati hai


Mere blog par translitration kam nahi kar raha hai koi sujhav ho to batayein

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

बहुत ही सुकोमल मनुहार!!

Mayank Bhardwaj said...

जी करता है रूठ जाऊँ मैं,
हँसके आ जाओ मनाने तुम

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

veerubhai said...

बहुत अच्छा लिख रहीं हैं आप .बधाई .छू कर देखू तो मानू -सच हो या खाब हो तुम .

Rachana said...

छूके देखूँ तो मानूँ मैं,
सच हो या ख़्वाब हो न जाने तुम !
आज भी हूँ मैं फ़िदा तुम पर,
क्या अब भी हो मेरे दीवाने तुम?
bahuut sunder
rachana

Kunwar Kusumesh said...

कोमल सुंदर रचना.

दिगम्बर नासवा said...

कोमल भावों को बेहतरीन तरीके से पेश किया है आपने ...

संध्या शर्मा said...

जी करता है रूठ जाऊँ मैं,
हँसके आ जाओ मनाने तुम !

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

Patali-The-Village said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति|

knkayastha said...

बहुत प्यारे भाव...
खूबसूरत रचना...

संजय भास्कर said...

जी करता है रूठ जाऊँ मैं,
हँसके आ जाओ मनाने तुम !

मेरे सीने पे सर रखकर अपना,
यूँ न रहो बनकर बेगाने तुम !

बहुत ही कम शब्दों बड़े ही खूबसूरत और मनभावन अहसास भर दिए इस रचना में आपने.. बहुत सुंदर रचना.. बधाई स्वीकार करें...

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

बबली जी यही सही रहेगा -

जी करता है रूठ जाऊँ मैं,
हँसके आ जाओ मनाने तुम !
वो गाना है ना - तुम रूठी रहो मै मनाता रहूँ की मजा जीने का और कुछ आता है -सुन्दर रचना

भ्रमर ५

Vivek Jain said...

जी करता है रूठ जाऊँ मैं,
हँसके आ जाओ मनाने तुम !

बहुत सुंदर,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

जयकृष्ण राय तुषार said...

बहुत सुन्दर शब्द रचना बधाई |

Amrita Tanmay said...

सुन्दर रचना पढवाने के लिए आभार .

Maheshwari kaneri said...

छूके देखूँ तो मानूँ मैं,
सच हो या ख़्वाब हो न जाने तुम !
आज भी हूँ मैं फ़िदा तुम पर,
क्या अब भी हो मेरे दीवाने तुम?
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

Manish said...

आज भी हूँ मैं फ़िदा तुम पर,
क्या अब भी हो मेरे दीवाने तुम?

जटिलता से भरा हुआ... :)

ज्योति सिंह said...

छूके देखूँ तो मानूँ मैं,
सच हो या ख़्वाब हो न जाने तुम !
आज भी हूँ मैं फ़िदा तुम पर,
क्या अब भी हो मेरे दीवाने तुम?
bahut hi mithe ahsaas bhare hai inme .sundar .

kumar said...

bahut hi khubsurat likha hai......

mahendra srivastava said...

हर लाइन लाजवाब

जी करता है रूठ जाऊँ मैं,
हँसके आ जाओ मनाने तुम !

बहुत सुंदर

veerubhai said...

बेहद के खूब -सूरत ख्याल को लफ्जों में पिरोया है .

नीरज गोस्वामी said...

जी करता है रूठ जाऊँ मैं,
हँसके आ जाओ मनाने तुम !

लाजवाब...वाह

नीरज

Apanatva said...

bahut pyar samete pyaree rachana.....