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Friday, July 22, 2011


बम ब्लास्ट

बम ब्लास्ट की आवाज़ जब मुंबई में बरसी,
तब हर जान ख़ुद को बचाने को तरसी,
पलक झपकते ही हो गई तबाही,
मौत के घाट उतार दिए गए सभी !


कुछ इलाके के लोग बेखबर थे,
हमले के स्थल पर लोग शोक मना रहे थे,
जाने कितने मासूम लोगों की जानें गईं,
परिवार में अपनों की अपूर्णता छा गई !

आख़िर क्यूँ हुआ पहले सा भयंकर हादसा?
है सबके मन में ये एक ही जिज्ञासा,
क़ाश कसब को फांसी मिल गई होती,
आतंकवादी को जीती जागती सीख मिलती !

दुःख होता है ऐसे हादसे होते हुए देखकर,
अपने देश को बर्बादी से बचाना है मिलकर,
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है,
इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है !


34 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

दुःख होता है ऐसे हादसे होते हुए देखकर,
अपने देश को बर्बादी से बचाना है मिलकर,
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है,
इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है !
--
बहुत ही संवेदनशील रचना पोस्ट की है आपने तो!
वाकई इन्सानियत सबसे बड़ा धर्म है!

Kunwar Kusumesh said...

इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है.
absolutely correct.

Rakesh Kumar said...

दुःख होता है ऐसे हादसे होते हुए देखकर,
अपने देश को बर्बादी से बचाना है मिलकर,
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है,
इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है !

आपकी संवदनशीलता सराहनीय है,बबली जी.
इंसानियत के धर्म को समझ लें सब कोई तो वह ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है.

आपका इस ओर प्रयास प्रेरणादायक है.बहुत सुन्दर प्रस्तुति की है आपने.बहुत बहुत आभार.

मेरे ब्लॉग पर आपने जो सद् विचार प्रस्तुत किये उसके लिए भी मैं आपका आभारी हूँ.

knkayastha said...

सामयिक...

Kailash C Sharma said...

इस तरह के हादसों में जब निर्दोष लोगों की जान जाती है तो रूह काँप उठाती है..बहुत सुन्दर मर्मस्पर्शी प्रस्तुति..

Dr Varsha Singh said...

दुःख होता है ऐसे हादसे होते हुए देखकर,
अपने देश को बर्बादी से बचाना है मिलकर,
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है,
इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है !


पीड़ा की सहज अभिव्यक्ति को साथ-साथ
यथार्थ के धरातल पर रची गयी एक सार्थक प्रस्तुति !

वीना said...

पता नहीं कब तक बंद होगा ये सब....

संवेदनशील रचना...

संध्या शर्मा said...

इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है,
इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है

संवेदनशील रचना....प्रेरणादायक प्रयास...

Amrita Tanmay said...

ऐसी तबाही से दिल दहल जाता है . सबसे बड़ा कर्म इंसान की मदद करना है .संवेदनशील रचना है .

Dr (Miss) Sharad Singh said...

वर्तमान दशा का सटीक रचना.....वस्तुतः हम अव्यवस्थातंत्र में जी रहे हैं.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सार्थक रचना ... आज इंसान में इंसानियत ही नहीं रही ... ऐसे हादसे बहुत पीड़ा देते हैं ..अच्छी और संवेदनशील प्रस्तुति

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

aisi ghatnayein dekhkar man bechain ho jata hai..jakhm dene wale kash insan ban jaate..insaniyat ko aatamsat kar paate..haiwano ko bhi sochne ke liye bibash karti hui kriti..baise aapki do andaj dekhe..dono hi ras aaye..man ko bhaye...badhayi ke sat

S.N SHUKLA said...

सार्थक पोस्ट, बहुत सुन्दर

संजय भास्कर said...

इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है
सुन्दर मर्मस्पर्शी प्रस्तुति.....इन्सानियत सबसे बड़ा धर्म है

पी.एस .भाकुनी said...

इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है,
इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है !
सहमत हूँ आपसे, कितना अच्छा होता यदि सम्पूर्ण जगत मे बस एक ही धर्म होता और
वह धर्म होता इंसानियत का.........
आभार उप्रोक प्रस्तुती हेतु. ,

Rajesh Kumari said...

bahut bhaav poorn rachna.is dukhad ghatna ka jitna dhikkar karen kam hai.humaara shasan tantra pangu ho gaya hai.koi ummeed baki na rahi.

जयकृष्ण राय तुषार said...

सारगर्भित और उत्कृष्ट कविता बधाई और सुखद शुभकामनायें |

prerna argal said...

मुझे ये बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है की हिंदी ब्लॉगर वीकली{१} की पहली चर्चा की आज शुरुवात हिंदी ब्लॉगर फोरम international के मंच पर हो गई है/ आपकी "aasmaan" उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज सोमवार को इस मंच पर की गई है /इस मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है /आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/इस मंच का लिंक नीचे लगाया है /आभार /

www.hbfint.blogspot.com

Bhushan said...

मानव धर्म की ओर इंगित करती आप की रचना ऐसे हादसों की त्रासदी की दुखदायी तस्वीर भी दे जाती है.
महत्वपूर्ण पोस्ट.

kumar said...

waqt ke saanche men dhhali hui rachna...jo dil men utarne ka hunar rakhri hai.....

pahli baar pda aaj aapko....

achha laga...
aage bhi padna chahunga...
join kar rha hun..


mere blog par aapka swagat hai....

Kajal Kumar said...

वाह. संवेदनशील.

veerubhai said...

बिना रीढ़ के प्रजातंत्र में और हो भी क्या सकता है .इंसानियत ५%फीसद लोगों की देश को चलाये है .

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय बबली जी हार्दिक अभिवादन -बेहद मार्मिक ,दर्दीली रचना ,मुम्बई तो शिकार का अड्डा बन गया है ,रक्षक सोये पड़े हैं आतंकी मुर्गा छान रहे हैं .क्या होगा इस देश का यही ऐसे ही चलता ??

आप के ब्लॉग बहुत सुन्दर है इंग्लिश के ब्लॉग भी खुबसूरत ..
शुक्ल भ्रमर ५

दुःख होता है ऐसे हादसे होते हुए देखकर,
अपने देश को बर्बादी से बचाना है मिलकर,
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है,
इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है !

upendra shukla said...

bahut acchi kavita saarthak visay par

कविता रावत said...

दुःख होता है ऐसे हादसे होते हुए देखकर,
अपने देश को बर्बादी से बचाना है मिलकर,
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है,
इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है !
...........
यथार्थ के धरातल पर रची बहुत ही संवेदनशील सार्थक अभिव्यक्ति के लिए आभार!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

दुःख होता है ऐसे हादसे होते हुए देखकर,
अपने देश को बर्बादी से बचाना है मिलकर,
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है,
इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है !

Sach kaha aapne...

Mukesh Kumar Sinha said...

dil ka dard ubhar aaya padh kar...!

रेखा said...

पता नहीं ऐसी घटनाओं से कब मुक्ति मिलेगी विश्व को ,...अभी कुछ दिन पहले नार्वे में भी ....

नीलांश said...

very good post

Mani Singh said...

इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है !बहुत सार्थक रचना !

Rajeev Panchhi said...

You're right. 'Humanity' is the need of the hour. Thanks for being so sensitive towards the victims.

नीरज गोस्वामी said...

सच्ची सटीक बात कही है आपने...

नीरज

mahendra srivastava said...

सीधी सच्ची बात...
दुःख होता है ऐसे हादसे होते हुए देखकर,
अपने देश को बर्बादी से बचाना है मिलकर,

हालात तो ये हो गए हैं कि

हर शख्स अपनी तस्वीर को बचा कर निकले,
ना जाने किस मोड पर किस हाथ से पत्थर निकले

Apanatva said...

saamyik samvedansheel abhivykti.....


इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है,
इंसान की मदद करना सबसे बड़ा कर्म है !
--saty vachan.....