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Sunday, July 17, 2011


आसमान

इतने बड़े आसमान में से,
एक कोना ही हमें दे देते,
कोई नाम न हम तुम्हें देते,
तुम हमें कोई नाम नहीं देते !

कितने खेल खेल लेते हो,

कभी धूप कभी बारिश बनके,
छाँव में बैठ तुम्हें निहारूँ तो,
काश सुना पाती दर्द मन के !

कभी इशारे से जो मुझे कहते,

तुम्हें दिल का हाल सुनाती,
तुमसे कुछ पूछूँ तो भला कैसे,
जवाब तुमसे कुछ नहीं मैं पाती !

ढूँढ़ रही हूँ ख़ुशी मैं हर तरफ़,

न जाने कब कहाँ मिलेगी,
तुमसे ही उम्मीद मुझे बाकी,
तेरे आंगन मेरी बगिया खिलेगी !


34 comments:

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

jawaab ki talaash to humko bhee hai kayee zamaano se....

khoobsoorat abhivyakti Babliji...

meri nayi post "ehsaas" pe aapka swaagat hai!

अनुपमा त्रिपाठी... said...

सुंदर आशा ...
सुंदर अभिव्यक्ति ...

Manish Kr. Khedawat said...

sunder :)
:clap: :clap:

Dr (Miss) Sharad Singh said...

कभी इशारे से जो मुझे कहते,
तुम्हें दिल का हाल सुनाती,
तुमसे कुछ पूछूँ तो भला कैसे,
जवाब तुमसे कुछ नहीं मैं पाती !


भावपूर्ण सुन्दर कविता...खूबसूरत चित्र ...खूबसूरत प्रस्तुति...

Rakesh Kumar said...

ढूँढ़ रही हूँ ख़ुशी मैं हर तरफ़,
न जाने कब कहाँ मिलेगी,
तुमसे ही उम्मीद मुझे बाकी,
तेरे आंगन मेरी बगिया खिलेगी !

कस्तूरी मृग में बसे,मृग ढूंढे बन माहि

आपकी 'उम्मीद' में ही तो सब खुशियाँ समाई
हुई हैं.
खुशी को आप कहाँ ढूँढ रही हैं,बबली जी,खुशी ही आपको ढूँढ रही है.
जिसकी आप हैं उसी का तो है सारा आसमान और ये जहाँ है.फिर आप तो मालकिन हुई इन सभी की.

आपकी भावपूर्ण प्रस्तुति से मन गद गद हो गया है.आभार.

पी.एस .भाकुनी said...

इतने बड़े आसमान में से,
एक कोना ही हमें दे देते,.........
सुंदर अभिव्यक्ति ...

Mukesh Kumar Sinha said...

कितने खेल खेल लेते हो,
कभी धूप कभी बारिश बनके,
छाँव में बैठ तुम्हें निहारूँ तो,
काश सुना पाती दर्द मन के !

kuchh khubsurat ban padi hai ye panktiyan....!!
pyari si rachna..

smshindi By Sonu said...

जितना सुंदर चित्र, उतनि ही सुंदर रचना!

संजय भास्कर said...

खूबसूरत चित्र ...
सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं......आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं !

prerna argal said...

कितने खेल खेल लेते हो,
कभी धूप कभी बारिश बनके,
छाँव में बैठ तुम्हें निहारूँ तो,
काश सुना पाती दर्द मन के bahut sunder prastuti babliji dil ko choo gai.badhaai aapko.



please visit my blog.thanks

vidhya said...

सुंदर आशा ...
सुंदर अभिव्यक्ति ...

संध्या शर्मा said...

इतने बड़े आसमान में से,
एक कोना ही हमें दे देते,
खूबसूरत प्रस्तुति...

knkayastha said...

ढूँढ़ रही हूँ ख़ुशी मैं हर तरफ़,
न जाने कब कहाँ मिलेगी,
तुमसे ही उम्मीद मुझे बाकी,
तेरे आंगन मेरी बगिया खिलेगी !

वाह... बहुत खूबसूरत...

mridula pradhan said...

कोई नाम न हम तुम्हें देते,
तुम हमें कोई नाम नहीं देते !
bahut sunder.......

Kunwar Kusumesh said...

सुंदर अभिव्यक्ति .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत अभिव्यक्ति ...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

बुत ही खूबसूरत अभिव्यक्ति ....

Dr Varsha Singh said...

कितने खेल खेल लेते हो,
कभी धूप कभी बारिश बनके,
छाँव में बैठ तुम्हें निहारूँ तो,
काश सुना पाती दर्द मन के !

आन्तरिक भावों के सहज प्रवाहमय सुन्दर रचना....

Amrita Tanmay said...

हृदयस्पर्शी भाव हैं ,बहुत सुंदर लिखा है |

Patali-The-Village said...

बहुत अच्छी सार्थक अभिव्यक्ति|

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

सुंदर भावनायें , सुंदर रचना.

chirag said...

kafi acchi poem hain...
dil se nikali hain

Kailash C Sharma said...

सुन्दर भाव लिये बहुत सकारात्मक प्रस्तुति..बहुत सुन्दर

Vivek Jain said...

सुंदर अभिव्यक्ति ,

विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Abnish Singh Chauhan said...

ढूँढ़ रही हूँ ख़ुशी मैं हर तरफ़,
न जाने कब कहाँ मिलेगी,
तुमसे ही उम्मीद मुझे बाकी,
तेरे आंगन मेरी बगिया खिलेगी !

सुंदर भावना. बधाई स्वीकारें

सुधीर said...

प्यारी रचना

A said...

Very nice poem

chirag said...

nice poem...

prerna argal said...

मुझे ये बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है की हिंदी ब्लॉगर वीकली{१} की पहली चर्चा की आज शुरुवात हिंदी ब्लॉगर फोरम international के मंच पर हो गई है/ आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज सोमवार को इस मंच पर की गई है /इस मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है /आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/इस मंच का लिंक नीचे लगाया है /आभार /

www.hbfint.blogspot.com

veerubhai said...

हर कोई चाहता है एक मुठ्ठी आसमान .प्रेम के अभाव में आदमी अ-प्रयोज्य (वेस्तिजियल )अंग हो जाता है .

veerubhai said...

हर कोई चाहता है एक मुठ्ठी आसमान .प्रेम के अभाव में आदमी अ-प्रयोज्य (वेस्तिजियल )अंग हो जाता है .प्रेम बिना जग सूना -तुम बिन जाऊं कहाँ ?

Rajesh Kumari said...

bahut achche bhaavon ko sanjoye hue hai yeh kavita.

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

बबली जी इतने इशारे क्या कम है अब कोई नाम दो ..कोना क्या सारा जहाँ ले लो ..ख़ुशी ही ख़ुशी ही तो है हर जगह ..सुन्दर रचना कवियित्री की कल्पना लाजबाब है
शुक्ल भ्रमर ५

कितने खेल खेल लेते हो,
कभी धूप कभी बारिश बनके

कभी इशारे से जो मुझे कहते,
तुम्हें दिल का हाल सुनाती,

Apanatva said...

sunder abhivykti.