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Sunday, July 3, 2011


चेहरा

चिंता और प्यार का संगम देखा,
झुर्रियों की तह के पीछे,
डबडबाती हुई आँखों में अजीब सी चमक,
और चेहरे पे एक खोखली सी हँसी देखी !

अपने हाथों की लकीरों को देखती हुई आँखें,
जैसे अब भी कुछ होने का इंतज़ार है,
फिर देखती हुई पल्लू में पड़ी एक गाँठ को,
जैसे जीवन भर की दास्तान उसमें समाई हो !

कुछ बीती और बिखरी यादों की पनाह में,
लगा जैसे उनकी एक ज़िन्दगी चल रही है,
वर्त्तमान के खांचे में नज़र आए,
जैसे अतीत की खिड़की खुल रही है !

कुछ सोचते हुए आँखें भर आईं उनकी,
आँखों में अब भी दर्द झलकता है,
और चेहरे पे उभर आयी है...
एक जानी पहचानी सी मुस्कान !


36 comments:

अनुपमा त्रिपाठी... said...

सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति

amrendra "amar" said...

बहुत खूब ..सुन्दर अभिव्यक्ति

prerna argal said...

bahut dardmai,bhavmai prastuti badhaai sweekaren.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

भाव मयी अभिव्यक्ति

Ricardo Miñana said...

Upon reaching the age acquire the gift of wisdom, a great pleasure going through your house.
happy week.

रविकर said...

बहुत सुन्दर | हृदयग्राही ||

Ankur jain said...

beautyful poem...so touchng

upendra shukla said...

chote sabdo me bahut kuch kahne wali rachna
amazing
"samrat bundelkhand"

Sawai SIingh Rajpurohit said...

सुंदर चित्र, उतनि ही सुंदर रचना आपकी आभार.

Kunwar Kusumesh said...

भावपूर्ण अभिव्यक्ति.

Rakesh Kumar said...

चहरे के भावों को बहुत खूबसूरती से उकेरा है
बबली जी आपने .आपकी संवेदनशीलता को नमन है मेरा.आपकी अभिव्यक्ति से आपके कोमल भावुक हृदय के दर्शन होते हैं.

Bhushan said...

अपने हाथों की लकीरों को देखती हुई आँखें,
जैसे अब भी कुछ होने का इंतज़ार है,
फिर देखती हुई पल्लू में पड़ी एक गाँठ को,
जैसे जीवन भर की दास्तान उसमें समाई हो !

बहुत रचनात्मक पंक्तियाँ जो एक परिपक्व आयु की तस्वीर खींच देती है. सुंदर कविता.

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

कुछ सोचते हुए आँखें भर आईं उनकी,
आँखों में अब भी दर्द झलकता है,
और चेहरे पे उभर आयी है...
एक जानी पहचानी सी मुस्कान !

khoob....Bahut badhiya abhivykti

Rachana said...

कुछ बीती और बिखरी यादों की पनाह में,
लगा जैसे उनकी एक ज़िन्दगी चल रही है,
वर्त्तमान के खांचे में नज़र आए,
जैसे अतीत की खिड़की खुल रही है !
sunder abhivyakti sunder shbadon me
rachana

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

बहुत ही भावपूर्ण!!

Vivek Jain said...

बहुत बढ़िया,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Dr (Miss) Sharad Singh said...

कुछ बीती और बिखरी यादों की पनाह में,
लगा जैसे उनकी एक ज़िन्दगी चल रही है,
वर्त्तमान के खांचे में नज़र आए,
जैसे अतीत की खिड़की खुल रही है !


कोमल भावनाओं से भरी सुन्दर रचना....

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

हृदयस्पर्शी भावाभिव्यक्ति .......

रचना के साथ चित्र का संयोजन अद्वितीय

गिरधारी खंकरियाल said...

वृद्धावस्था में सार्वभौमिक अनुभव होने लगते है तब बड़ी चतुराई से वृद्ध जन अपनी भावनाओं को चेहरे से हटा देते हैं . आवश्यकतानुसार . सही उल्लेख किया

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति .

वीना said...

बहुत सुंदर भाव और अभिव्यक्ति....

chirag said...

lovely poem

Sunil Kumar said...

sundar atisundar vah vah .....

Jyoti Mishra said...

This is a post which u can simply call AWESOME !!!!

Very beautifully written.
Chehra sab bolta hai :)

वाणी गीत said...

झुर्रियों के पीछे का प्यार और चिंता ...
भावपूर्ण अभिव्यक्ति !

G.N.SHAW said...

marmik kaveetaa

Manish said...

पल्लू में पड़ी एक गाँठ से सचमुच एक चेहरा आँखों में उतर सा आया है..

सहज साहित्य said...

उर्मि जी ये पंक्तियाँ मन को छू गई , धीरे से -
अपने हाथों की लकीरों को देखती हुई आँखें,
जैसे अब भी कुछ होने का इंतज़ार है,
फिर देखती हुई पल्लू में पड़ी एक गाँठ को,
जैसे जीवन भर की दास्तान उसमें समाई हो !

सुधीर said...

सुन्दर अभिव्यक्ति

संजय भास्कर said...

आदरणीय बबली जी
नमस्कार !
चहरे के भावों को बहुत खूबसूरती से उकेरा है.... आपने
......बहुत ही भावपूर्ण!!

संजय भास्कर said...

अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

devendra gautam said...

झुर्रियों की तह के पीछे,
डबडबाती हुई आँखों में अजीब सी चमक,
और चेहरे पे एक खोखली सी हँसी देखी !

भावों की जीवंत अभिव्यक्ति ! कविता पढ़ते हुए आखों के सामने चेहरा नाच जा रहा है. चिंता और प्यार के बीच समन्वय बनता चेहरा. बधाई हो.

जयकृष्ण राय तुषार said...

बहुत ही प्यारी सी कविता और बहुत भावनात्मक सोच बधाई और शुभकामनायें |

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

चिंता और प्यार का संगम देखा,
झुर्रियों की तह के पीछे,
डबडबाती हुई आँखों में अजीब सी चमक,
और चेहरे पे एक खोखली सी हँसी देखी !
--
बहुत सुन्दर चित्रण!

वीना said...

सुंदर.....

श्याम सखा 'श्याम' said...

ढूँढ़ रही हूँ ख़ुशी मैं हर तरफ़,
न जाने कब कहाँ मिलेगी,


apne man men dhoondho vhan milegi